सीमा पार कवरेज संबंधी प्रावधानों के मानकीकरण पर परिपत्र जारी करने पर विचार करे इरडा:न्यायालय
सीमा पार कवरेज संबंधी प्रावधानों के मानकीकरण पर परिपत्र जारी करने पर विचार करे इरडा:न्यायालय
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) को सभी मोटर बीमा पॉलिसियों में सीमा पार बीमा कवरेज संबंधी प्रावधानों को एकरूप बनाने के लिए एक मास्टर परिपत्र जारी करने पर विचार करने की सलाह दी।
न्यायालय ने कहा कि बीमा पॉलिसी में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा स्पष्ट और असंदिग्ध होनी चाहिए तथा यदि किसी पॉलिसी में भारत के बाहर के क्षेत्र में भी बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाना है, तो इसका स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान में ऐसा कोई स्पष्ट कानून या नियामक स्पष्टीकरण लागू नहीं है जो सीमा पार यात्रा के लिए बीमा पॉलिसी के कवरेज के विस्तार को स्पष्ट करता हो।
पीठ ने कहा, ‘‘इस अनिश्चितता के कारण मोटर दुर्घटना दावों के समयबद्ध और प्रभावी निपटारे में बाधाएं आती हैं, जिसका सबसे अधिक नुकसान दावेदारों को उठाना पड़ता है।’’
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक बीमा कंपनी की उस अपील पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फरवरी, 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने कंपनी को नेपाल में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिजनों को 32.67 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।
पीठ ने कहा कि वर्ष 2010 में दुर्ग से धार्मिक यात्रा पर नेपाल जा रही एक बस पहाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें चालक सहित तीन लोगों की मृत्यु हो गई थी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘अंतर-देशीय परिवहन वाहन नियम, 2021’ अब भारतीय वाहनों को वैध अंतर-देशीय परमिट के तहत अन्य देशों की यात्रा करने के लिए एक संरचित कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘इन नियमों में यह अनिवार्य किया गया है कि अंतर-देशीय परमिट वाले वाहन के पास वैध बीमा पॉलिसी हो। हालांकि, इनमें यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि घरेलू बीमा पॉलिसी का कवरेज उस देश तक स्वतः विस्तारित होगा या नहीं, जहां वह वाहन संचालित किया जाएगा।’’
अदालत ने कहा, ‘‘जब अनुबंध का पूरा मसौदा तैयार करने का अधिकार एक ही पक्ष के पास होता है और वह अस्पष्ट पॉलिसी तैयार करता है, तो इसका नुकसान सामान्य पॉलिसीधारक को उठाना पड़ता है।’’
पीठ ने कहा कि कई मामलों में बीमा कंपनियों ने इस अस्पष्टता का लाभ उठाकर या तो उस दायित्व से बचने की कोशिश की, जिसका वहन उन्हें करना चाहिए था, या फिर पॉलिसी की अस्पष्ट भाषा के कारण ऐसे दायित्व का सामना करना पड़ा, जिसे वह स्वीकार करने का उनका कभी इरादा नहीं था।
अदालत ने सुझाव दिया कि यदि सीमा पार बीमा कवरेज उपलब्ध नहीं है, तो इसका स्पष्ट उल्लेख पॉलिसी में किया जाना चाहिए। साथ ही, बीमाधारक को यह भी बताया जाना चाहिए कि दूसरे देश की यात्रा से पहले अलग से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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