करगिल, लेह में 2017-18 से 1,000 इकाइयां स्थापित, 8200 से अधिक लोगों को मिला रोजगार: केवीआईसी

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करगिल, लेह में 2017-18 से 1,000 इकाइयां स्थापित, 8200 से अधिक लोगों को मिला रोजगार: केवीआईसी

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  • Publish Date - November 2, 2020 / 02:45 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:59 PM IST

नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने सोमवार को कहा कि उसने करगिल और लेह में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत विभिन्न छोटी और मध्यम आकार की लगभग 1,000 विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं। वर्ष 2017-18 से स्थापित इन इकाइयों के जरिये केवल साढ़े तीन साल की अवधि में ही स्थानीय युवाओं के लिए 8,200 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।

केवीआईसी ने बयान में कहा कि उसने इन इकाइयों की मदद के लिये 2017-18 से 32.35 करोड़ रुपये जारी किये।

आयोग ने कहा कि लोहे और स्टील की वस्तुओं से लेकर सीमेंट ब्लॉक के विनिर्माण, वाहनों की मरम्मत, कपड़े की सिलाई, लकड़ी के फर्नीचर बनाने की इकाइयां, साइबर कैफे, ब्यूटी पार्लर और सोने के आभूषणों के निर्माण आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनके लिये सहायता प्रदान की है।

केवीआईसी ने एक बयान में कहा, ‘‘इससे स्थानीय लोगों को सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में मदद मिली है। यहां तक कि 2020-21 के पहले 6 महीनों के दौरान, कोविड-19 लॉकडाउन के बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में करगिल में 26 और लेह में 24 नई परियोजनाएं स्थापित करने में मदद उपलब्ध करायी गयीं, जिससे रोजगार का सृजन हुआ।’’

केवीआईसी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिये नोडल एजेंसी है।

बयान के अनुसार, ‘‘केवीआईसी ने 2017-18 से 2020-21 (30 सितंबर तक) के दौरान करगिल में 802 परियोजनाएं और लेह में 191 परियोजनाएं स्थापित की हैं। जिसमें करगिल में 6,781 और लेह में 1421 रोजगारों का सृजन हुआ। केवीआईसी ने करगिल में इन परियोजनाओं के लिए मार्जिन मनी के रूप में 26.67 करोड़ रुपये का वितरण किया, जबकि इसी अवधि के दौरान लेह क्षेत्र में 5.68 करोड़ रुपये दिये गये।’’

केंद्र सरकार लेह-लद्दाख के विकास को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा, ‘‘… करगिल और लेह ने विभिन्न विनिर्माण गतिविधियों को बनाए रखने की अपार क्षमता दिखाई है। यह क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों से लगभग छह महीने तक कटा रहता है। हालांकि, ये इकाइयां इन क्षेत्रों में पूरे वर्ष सामानों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी।’’

भाषा

मनोहर रमण

मनोहर