तिरुवनंतपुरम, नौ जनवरी (भाषा) केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार आम बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्रालय की तरफ से बुलाई गई बैठक के दौरान केंद्र द्वारा लगाए गए वित्तीय प्रतिबंधों का मुद्दा उठाएगी।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह शनिवार को नयी दिल्ली में होने वाली इस बैठक में शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नीतिगत निर्णयों के माध्यम से केरल की अर्थव्यवस्था को विनियमित और प्रतिबंधित कर रही है।
बालगोपाल ने कहा, ”केरल की ऋण सीमा के अनुसार राज्य को चालू वित्त वर्ष के अंतिम तीन महीनों में 12,000 करोड़ रुपये मिलने थे। हालांकि, इसे लगभग आधा घटाकर 5,900 करोड़ रुपये कर दिया गया।”
उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में राज्य को मिलने वाले 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में केंद्र ने कटौती की है। इसके अलावा जीडीपी और जीएसडीपी के आंकड़ों के आधार पर 4,200 करोड़ रुपये कम कर दिए गए। उन्होंने कहा कि इस मामले को पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष उठाया जा चुका है।
बालगोपाल ने कटौती का विवरण देते हुए कहा कि बजट से बाहर लिए गए ऋणों के लिए 4,700 करोड़ रुपये, गारंटी मोचन निधि के तहत 3,300 करोड़ रुपये, और उच्चतम न्यायालय जाने के बाद मिले 1,922 करोड़ रुपये अब काट लिए गए हैं। साथ ही जीएसडीपी और आईजीएसटी के आंकड़ों में विसंगतियों का हवाला देकर 965 करोड़ रुपये कम कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, ”यह मैच के अंतिम ओवरों में बेईमानी करने जैसा है। यह वित्त वर्ष का अंतिम चरण है और चुनाव का समय भी है।”
बालगोपाल ने कहा कि इन कार्रवाइयों से केरल बुरी तरह प्रभावित होगा, खासकर तब जब राज्य सरकार ने पिछले साल नवंबर में कल्याणकारी पेंशन राशि में वृद्धि सहित कई कल्याणकारी उपायों की घोषणा की है।
उन्होंने आरोप लगाया, ”शायद ये कदम इसलिए उठाए गए क्योंकि भाजपा और यूडीएफ इन कल्याणकारी उपायों से असहज थे।”
भाषा पाण्डेय रमण
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