जुलाई अंत तक खरीफ बुवाई का रकबा तीन प्रतिशत घटकर 894 लाख हेक्टेयर पर
जुलाई अंत तक खरीफ बुवाई का रकबा तीन प्रतिशत घटकर 894 लाख हेक्टेयर पर
नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) चालू सत्र में जुलाई के आखिर तक धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा तीन प्रतिशत घटकर 894.22 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि, सामान्य क्षेत्र के 81 प्रतिशत हिस्से में बुवाई का काम पूरा हो चुका है। सोमवार को जारी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
पिछले साल इसी अवधि में बुवाई का रकबा 920.71 लाख हेक्टेयर था।
पूरे 2025-26 सत्र में खरीफ का कुल रकबा 1,143.27 लाख हेक्टेयर था। खरीफ की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ होती है और कटाई अक्टूबर से शुरू होती है।
मुख्य खरीफ फसल धान की बुवाई 31 जुलाई तक 301.49 लाख हेक्टेयर में हुई, जो एक साल पहले 308.39 लाख हेक्टेयर थी। इसमें कमी मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, हरियाणा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में देखी गई।
दलहन का रकबा भी पहले के 101.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 95.18 लाख हेक्टेयर रह गया। अरहर की बुवाई पहले के 38.44 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 34.91 लाख हेक्टेयर और मूंग की बुवाई पहले के 32.23 लाख हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 29.22 लाख हेक्टेयर रह गई। हालांकि, उड़द का रकबा पहले के 19.04 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 21.08 लाख हेक्टेयर हो गया। दलहन के रकबे में यह कमी मुख्य रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा और मध्य प्रदेश में देखी गई।
मोटे अनाज का रकबा भी घटकर 157.77 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि एक साल पहले यह 170.60 लाख हेक्टेयर था। मक्का की बुवाई 83.56 लाख हेक्टेयर, ज्वार की 12.16 लाख हेक्टेयर, बाजरा की 57.44 लाख हेक्टेयर और रागी की 1.87 लाख हेक्टेयर में हुई।
तिलहन खेती का रकबा थोड़ा बढ़कर 172.32 लाख हेक्टेयर (पहले 171.13 लाख हेक्टेयर) हो गया है। इसमें सोयाबीन 117.68 लाख हेक्टेयर (पहले 118.52 लाख हेक्टेयर), मूंगफली 43.06 लाख हेक्टेयर (पहले 41.90 लाख हेक्टेयर) और सूरजमुखी 98 हजार हेक्टेयर (पहले 58 हजार हेक्टेयर) शामिल हैं।
नकदी फसलों में, गन्ने का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि कपास का रकबा 106.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 103.54 लाख हेक्टेयर रह गया। जूट या मेस्टा का रकबा पहले के 6.21 लाख हेक्टेयर से थोड़ा बढ़कर 6.33 लाख हेक्टेयर हो गया। कपास के रकबे में कमी महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब में देखी गई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दो अगस्त तक दक्षिण-पश्चिम मानसून में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। मंत्रालय ने कहा कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति बनी हुई है और मध्य तथा पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है।
मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम के अनुमान भी संकेत देते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान अल-नीनो और मजबूत होता रहेगा।
केंद्रीय जल आयोग ने कहा है कि 30 जुलाई तक 166 जलाशयों में पानी का भंडार तत्काल आधार पर पिछले साल की तुलना में 65.37 प्रतिशत पर रहा। वहीं सामान्य भंडारण 92.99 प्रतिशत के स्तर पर है।
जिन राज्यों में पिछले साल की तुलना में जलाशय का की स्थिति बेहतर है, उनमें असम, छत्तीसगढ़, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा और पंजाब शामिल हैं, जबकि गोवा का भंडारण पिछले साल के बराबर था। जिन राज्यों में भंडारण एक साल पहले की तुलना में कम है, उनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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