मुंबई, 11 अगस्त (भाषा) भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने मंगलवार को कहा कि केवल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) आंकड़ों के आधार पर एमएसएमई इकाइयों को कर्ज देना चुनौतीपूर्ण है और इसके लिए बिजली खपत, दूरसंचार इस्तेमाल एवं अन्य डिजिटल आंकड़ों जैसे वैकल्पिक स्रोतों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
तिवारी ने यहां वार्षिक ‘फाइबैक’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जीएसटी और बैंकिंग आंकड़ों से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के एक बड़े हिस्से का आकलन किया जा सकता है, लेकिन बड़ी संख्या में कारोबार औपचारिक आंकड़ा व्यवस्था से बाहर हैं।
उन्होंने कहा, “कुल नौ करोड़ में से केवल एक करोड़ इकाइयां ही जीएसटी में पंजीकृत हैं। हर कोई वास्तव में इसी हिस्से के आंकड़ों का विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा है। यह भी एक बड़ी संख्या है। लेकिन ऐसे बहुत से (कारोबार) हैं, जो जीएसटी पंजीकृत नहीं हैं और उनका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।”
एसबीआई के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि बिजली की खपत, दूरसंचार के इस्तेमाल और अन्य डिजिटल गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों को ऋण सूचना ब्यूरो के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे कर्ज लेने वालों की अधिक व्यापक तस्वीर तैयार करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसे आंकड़ों का इस्तेमाल करने के इच्छुक ऋणदाताओं को कई मंचों और सेवा प्रदाताओं से आंकड़े जुटाकर उन्हें एकीकृत करना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया मुश्किल और महंगी हो जाती है।
तिवारी ने ऐसे वैकल्पिक आंकड़ों के आधार पर स्वचालित मॉडल विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि पर्याप्त ऐतिहासिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण ये मॉडल अभी शुरुआती चरण में हैं।
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