ब्रिक्स देशों में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा, तेज भुगतान प्रणाली जोड़ने पर बातचीत जारी: मल्होत्रा

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ब्रिक्स देशों में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा, तेज भुगतान प्रणाली जोड़ने पर बातचीत जारी: मल्होत्रा

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 07:44 PM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 07:44 PM IST

मुंबई, 11 अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (सीबीडीसी) और भारत के यूपीआई जैसी तेज भुगतान व्यवस्था को आपस में जोड़ने को लेकर बातचीत हो रही है। इसका उद्देश्य व्यापार और विदेशों से भेजे जाने वाले धन के लिए सस्ती और तेज भुगतान प्रणाली विकसित करना है।

मल्होत्रा ने यहां फिक्की और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के सालाना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सीमा पार भुगतान ब्रिक्स समूह समेत सभी देशों के लिए रुचि का विषय है, क्योंकि इसमें खासकर खुदरा लेनदेन में लागत कम करने और भुगतान की गति तेज करने की काफी गुंजाइश है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस दिशा में काफी काम हो रहा है। कई तरीके और विकल्प विचाराधीन हैं, लेकिन अभी यह चर्चा के स्तर पर है। इसमें केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा और तेज भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के विकल्प भी शामिल हैं।’’

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बाहर रहने वाले नागरिकों द्वारा भेजे गये पैसे लेनदेन के निपटारे में कई घंटे या कुछ मामलों में कई दिन लग जाते हैं, जबकि यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) जैसी प्रणाली से भुगतान तुरंत हो जाता है।

मल्होत्रा ने कहा कि वह मंगलवार को जयपुर के लिए रवाना होंगे। वहां वह बुधवार से शुरू होने वाली ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की पहली बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक तीन दिन तक चलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। भारत अन्य देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय बैंकों के बीच होने वाले समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहा है।

मल्होत्रा ने बताया कि फिलहाल भारत और आरबीआई ने चार देशों… इंडोनेशिया, मालदीव, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ ऐसे समझौते किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कई देशों के साथ हम स्थानीय मुद्राओं में व्यापार कर रहे हैं। हालांकि, इसकी मात्रा अभी कम है और हमें इसे बढ़ाने की जरूरत है।’’

पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव पर मल्होत्रा ने कहा कि देश के नीति-निर्माताओं ने हमेशा कोविड-19 महामारी और यूक्रेन युद्ध जैसे बाहरी संकट को अवसर में बदला है और उन्हें भरोसा है कि भारत पश्चिम एशिया संकट के बाद भी मजबूत होकर उभरेगा।

उन्होंने कहा कि अल्पकाल में पश्चिम एशिया संघर्ष से आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है, लेकिन इस चुनौती से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से लंबे समय में वृद्धि की गति तेज होगी।

मल्होत्रा ने कहा कि संकट के बीच सरकार ने ऊर्जा, उर्वरक और महत्वपूर्ण संसाधनों के स्रोतों में विविधता लाने, ऊर्जा खपत की तीव्रता कम करने, एथनॉल मिश्रण बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, मुक्त व्यापार समझौते करने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं, जिनका लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

मल्होत्रा ने कहा कि भारत के सामने मौजूद वैश्विक जोखिम केवल पश्चिम एशिया संघर्ष तक सीमित नहीं हैं। इनमें व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दे तथा साइबर सुरक्षा जोखिम भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय बैंकिंग क्षेत्र इन जोखिमों और चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’’

मल्होत्रा ने कहा कि देश का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत पूंजी आधार, फंसे हुए कर्ज में कमी और बेहतर लाभ के साथ मजबूत स्थिति में है। साथ ही, भारत की वृहद आर्थिक बुनियाद भी मजबूत हैं। वृद्धि दर में मजबूती बनी हुई है, महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में है और विदेशी मुद्रा भंडार भी संतोषजनक स्तर पर है।

भाषा रमण अजय

अजय