रुपये को अभी और गिरने दे आरबीआई, तरलता प्रबंधन को मिले प्राथमिकताः पूर्व गवर्नर सुब्बाराव

रुपये को अभी और गिरने दे आरबीआई, तरलता प्रबंधन को मिले प्राथमिकताः पूर्व गवर्नर सुब्बाराव

रुपये को अभी और गिरने दे आरबीआई, तरलता प्रबंधन को मिले प्राथमिकताः पूर्व गवर्नर सुब्बाराव
Modified Date: May 28, 2026 / 06:22 pm IST
Published Date: May 28, 2026 6:22 pm IST

(मनीष एम सुवर्ण)

मुंबई, 28 मई (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि बाहरी दबावों को झेलने के लिए केंद्रीय बैंक को रुपये में कुछ और गिरावट आने देनी चाहिए और महंगाई का जोखिम बढ़ने पर ब्याज दर बढ़ाने के बजाय तरलता प्रबंधन जैसे उपायों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सुब्बाराव ने पीटीआई-भाषा के साथ खास बातचीत में कहा कि विनिमय दर को संभालने के लिए मौद्रिक नीति का सहारा केवल ‘अंतिम उपाय’ के तौर पर लिया जाना चाहिए।

वर्ष 2008 से लेकर 2013 तक आरबीआई के गवर्नर रह चुके सुब्बाराव ने कहा, ‘‘रुपये के स्तर को बचाने के बजाय उसे परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित होने देना चाहिए, क्योंकि कमजोर रुपया बाहरी झटकों को झेलने में मदद करता है।’’

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘यदि आरबीआई को ऐसा लगता है कि महंगाई की स्थिति इसकी मांग करती है, तो वह मौद्रिक नीति को सख्त कर सकता है।’’

भू-राजनीतिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया संकट के कारण रुपया दबाव में है और इस महीने की शुरुआत में यह डॉलर के मुकाबले 97.15 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।

पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक करीब पांच प्रतिशत गिर चुका है जबकि इस वर्ष की शुरुआत से इसमें 6.1 प्रतिशत और एक साल के भीतर 10 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई है।

सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सामने संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि दरों में कटौती से महंगाई और विनिमय दर पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि आक्रामक दर बढ़ोतरी से आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

सुब्बाराव ने कहा कि मौजूदा स्थिति में दर बढ़ाने के बजाय इंतजार करना और महंगाई के रुझान का आकलन करना बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि यदि महंगाई में तेज बढ़ोतरी होती है, तो पहले तरलता या नकदी प्रबंधन के जरिये सख्ती की जा सकती है, न कि सीधे दर बढ़ाकर।

एमपीसी की बैठक तीन से पांच जून के बीच प्रस्तावित है, जिसमें नीतिगत दर पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल रेपो दर 5.25 प्रतिशत है और केंद्रीय बैंक पिछले वर्ष से अब तक इसमें 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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