LPG Cylinder Crisis: अब नहीं करना पड़ेगा इंतजार! हर घर सिलेंडर पहुंचाने की तैयारी, प्लान जानकर रह जाएंगे हैरान!

LPG Cylinder Crisis: ईरान-इजराइल तनाव के बीच गैस आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सरकारी कंपनियां नया प्लान तैयार कर रही है। लक्ष्य है कि एलपीजी को स्थिर रखना और ज्यादा लोगों तक आसानी से सिलेंडर पहुंचाना, ताकि भविष्य में किसी तरह की कमी या परेशानी न हो।

LPG Cylinder Crisis: अब नहीं करना पड़ेगा इंतजार! हर घर सिलेंडर पहुंचाने की तैयारी, प्लान जानकर रह जाएंगे हैरान!

(LPG Cylinder Crisis/ Image Credit: ANI News)

Modified Date: March 23, 2026 / 03:11 pm IST
Published Date: March 23, 2026 3:09 pm IST
HIGHLIGHTS
  • युद्ध के कारण एलपीजी सप्लाई पर खतरा बढ़ा
  • 14.2 किलो की जगह 10 किलो गैस देने का प्रस्ताव
  • कम गैस से ज्यादा घरों तक पहुंच बनाने की योजना

LPG Cylinder Crisis: ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष 22 दिनों से अधिक समय से थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच लगातार हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थित का असर भारत में एलपीजी उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को समय पर गैस सिलेंडर मिल सके इसके लिए सरकारी तेल कंपनियां पहले से तैयारी में जुट गई है।

कंपनी का नया प्लान

सरकारी कंपनियां एक अहम योजना पर विचार कर रही हैं, जिसके तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर में केवल 10 किलोग्राम एलपीजी भरी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य सीमित गैस स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाना है। अनुमान के मुताबिक, 10 किलोग्राम गैस भी एक सामान्य परिवार के लिए लगभग एक महीने तक चल सकती है, जिससे संकट के समय अधिक लोगों को राहत मिल सकेगी।

लागू करने पर क्या होगा बदलाव?

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडरों पर नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिसमें कम गैस की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, कीमतें भी उसी हिसाब से घटाई जाएंगी। इसके लिए बॉटलिंग प्लांटों को अपने सिस्टम में बदलाव करना होगा और सरकार से जरूरी मंजूरी लेनी पड़ेगी। हालांकि, कंपनियों को आशंका है कि अचानक बदलाव से लोगों में भ्रम और असंतोष पैदा हो सकता है, खासकर तब जब कई राज्यों में चुनाव नजदीक है।

भारत में खपत और सप्लाई की स्थिति

भारत में रोजाना करीब 93,500 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से 86% घरेलू उपयोग में आता है। हाल के दिनों में खपत में गिरावट भी दर्ज की गई है। देश अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी खाड़ी देशों की होती है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है और विकल्प सीमित हो सकते हैं।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।