एलपीजी उत्पादन, सीएनजी, पीएनजी को मिलेगी गैस आवंटन में प्राथमिकता, अधिसूचना जारी

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एलपीजी उत्पादन, सीएनजी, पीएनजी को मिलेगी गैस आवंटन में प्राथमिकता, अधिसूचना जारी

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 06:03 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 06:03 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन में बदलाव किया है, जिसके तहत एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारत की एक-तिहाई गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर गैर-प्राथमिकता क्षेत्रों से गैस मोड़कर प्रमुख उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

भारत अपनी 19.1 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन गैस खपत का लगभग आधा हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर की आवाजाही रुकने के कारण पश्चिम एशिया से आने वाली करीब छह करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन की गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।

बची हुई तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को नए सिरे से प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया गया है ताकि एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पीएनजी की मांग का 100 प्रतिशत, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की 80 प्रतिशत और उर्वरक इकाइयों की 70 प्रतिशत जरूरत पूरी की जा सके।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम स्थिति पर मिनट-दर-मिनट नजर रख रहे हैं और बदलती जरूरतों को लेकर सतर्क हैं। प्रमुख क्षेत्रों की समूची मांग पूरी करने के लिए अभी गैस आवंटन को नए सिरे से प्राथमिकता दी गई है।”

यह आवंटन मुख्य रूप से एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया गया है, जो पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण रसोई गैस की लगभग आधी आपूर्ति प्रभावित होने के बाद दबाव में आ गई थी।

सोमवार देर रात जारी गजट अधिसूचना में एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और घरों में पाइप से मिलने वाली रसोई गैस को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में सरकार ने रिफाइनरियों से एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने को कहा है।

एलपीजी मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस के प्रसंस्करण से प्राप्त होती है और कच्चे तेल की रिफाइनिंग के समय भी एक उप-उत्पाद के रूप में निकलती है। इसे प्रोपेन एवं ब्यूटेन गैसों को अलग कर शुद्ध करने के बाद तैयार किया जाता है।

उर्वरक क्षेत्र को इस सूची में दूसरी प्राथमिकता दी गई है और उसकी पिछले छह महीने की औसत मांग का कम-से-कम 70 प्रतिशत पूरा किया जाएगा।

इस सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन्हें परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीने की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत उपलब्ध कराया जाएगा।

शहरी गैस वितरण (सीजीडी) से जुड़ी कंपनियों द्वारा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को की जाने वाली आपूर्ति को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है।

अधिकारी ने अधिक ब्योरा न देते हुए कहा, ‘‘इन उपायों को लागू किए जाने के बाद उत्पादन में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति बहाल होने पर मौलिक अनुबंध दोबारा लागू कर दिए जाएंगे।

अधिकारी ने कहा, ‘‘इस दौरान हम बाजार में जाकर जहां से भी संभव हो, अधिक से अधिक आपूर्ति जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें हमें कुछ सफलता भी मिली है और आगे भी उपलब्ध सभी अवसरों का उपयोग करते रहेंगे।’’

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग छिड़ने से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री यातायात में कमी आई है और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और एलएनजी की लगभग एक-तिहाई आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

पाइपलाइन संचालन के लिए जरूरी कंप्रेसर ईंधन एवं अन्य उत्पादों को भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इनके बिना गैस पाइपलाइन का संचालन हो पाना संभव नहीं है।

अधिसूचना में कहा गया है कि एलएनजी आपूर्ति में व्यवधान के प्रभाव को कम करने के लिए तेल रिफाइनिंग कंपनियां अपनी रिफाइनरियों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति को पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 65 प्रतिशत तक घटाकर इस असर को यथासंभव उठाएंगी।

अधिसूचना के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली गैस कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड को प्राथमिकता पर आधारित इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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