अदालत ने कहा: ‘रिश्वत की रकम अपराध से प्राप्त धन’; पूर्व अधिकारी को राहत देने से किया इनकार

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अदालत ने कहा: ‘रिश्वत की रकम अपराध से प्राप्त धन’; पूर्व अधिकारी को राहत देने से किया इनकार

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 07:38 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 07:38 PM IST

मुंबई, 10 मार्च (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार वसई विरार महानरगपालिका (वीवीसीएमसी) के एक पूर्व अधिकारी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति रिश्वत लेता है, तो वह अपराध से प्राप्त धन माना जाता है।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने सोमवार को वीवीसीएमसी के शहरी नियोजन विभाग के पूर्व उपनिदेशक वाई शिवा रेड्डी की याचिका खारिज कर दी। रेड्डी ने अपनी गिरफ्तारी को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग करते हुए एक विशेष अदालत द्वारा जारी रिमांड आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया था।

पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार होने के बाद से न्यायिक हिरासत में रखे गये रेड्डी ने अपनी याचिका में कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके आवास की तलाशी लेने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि यह साबित करने के लिए ईडी के पास कोई सबूत नहीं है कि उनके निवास से जब्त किए गए कथित नकद और आभूषण अपराध से अर्जित आय से हासिल किये गये थे।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराएं ‘अपराध से प्राप्त धन’ को व्यापक अर्थों में परिभाषित करती हैं, जिसका मतलब है कि वैसी संपत्ति, जो किसी आपराधिक गतिविधि के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त या अर्जित की गई हो।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, ‘‘यदि कोई व्यक्ति रिश्वत लेता है, तो वह अपराध से प्राप्त धन हासिल करता है।’

आदेश की एक प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई।

भाषा सुरेश दिलीप

दिलीप