Gaurav Gogoi in Lok sabha Video || Image- Sansad tv File
Gaurav Gogoi in Lok sabha Video: नई दिल्ली: असम के दिग्गज नेता और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आज संसद में सरकार और प्रधानमंत्री की जमकर आलोचना की। गोगोई ने मोदी सरकार पर विपक्षी दलों के आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने दिवंगत प्रथम प्रधामंत्री जवाहर लाल नेहरू के वक्तव्यों को याद करते हुए सरकार को आइना दिखाया और पूछा कि, विपक्ष के नेता को बोलने के अधिकार के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है जबकि माइक्रोफोन बंद हैं। क्या यही वह संसदीय परंपरा है जिसे हम कायम रखना चाहते हैं?
लोकसभा में बोलते हुए गोगोई ने कहा, “अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के एक भाग में कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष सदन के सभी वर्गों का विश्वास हासिल करने के लिए आवश्यक निष्पक्ष रवैया नहीं अपना रहे हैं; कि वे अपने पक्षपातपूर्ण आचरण में सदस्यों के अधिकारों की अवहेलना करते हैं और ऐसे निर्णय और घोषणाएँ करते हैं जो उन अधिकारों को प्रभावित और कमजोर करने के उद्देश्य से की जाती हैं; और यह कि वे विवादास्पद मामलों पर खुले तौर पर सत्ताधारी दल का पक्ष लेते हैं।
यह चिंता 2 फरवरी को सदन की अध्यक्षता के दौरान माननीय अध्यक्ष के व्यवहार से स्पष्ट हो गई, जब विपक्ष के नेता बोल रहे थे। किसी भी लोकतंत्र में यह अपेक्षा की जाती है कि अध्यक्ष तटस्थ रहे और प्रत्येक सदस्य के बोलने के अधिकार की रक्षा करे। इसके विपरीत, विपक्ष के नेता को सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उठाने पर बार-बार बाधित किया गया। 9 फरवरी को श्री शशि थरूर के साथ भी ऐसा ही हुआ।
आज, जब भी कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेता वैचारिक आधार पर या नीतियों के आधार पर सरकार की आलोचना करने के लिए उठते हैं, तो उन्हें अक्सर बोलने से रोका जाता है। यह संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना को ही कमजोर करता है।”
Gaurav Gogoi in Lok sabha Video: गौरव गोगोई ने आगे कहा कि, “जैसा कि हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी ने एक बार कहा था, अध्यक्ष सदन की गरिमा और स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करते हैं। चूंकि सदन राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए अध्यक्ष राष्ट्र की स्वतंत्रता और आजादी के प्रतीक बन जाते हैं। लेकिन आज हम क्या देख रहे हैं? विपक्ष के नेता को बोलने के अधिकार के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है जबकि माइक्रोफोन बंद हैं। क्या यही वह संसदीय परंपरा है जिसे हम कायम रखना चाहते हैं?
अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद प्रस्ताव के उत्तर में उपस्थित न होने की सलाह दी, यह कहते हुए कि कुछ महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेरकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा करने का इरादा रखती हैं। शर्मनाक! शर्मनाक! शर्मनाक! विपक्ष की कई महिला सदस्यों को भी इस सदन में अपनी आवाज उठाने पर लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है।”
Part of the Motion (No-confidence Motion against the Lok Sabha Speaker) states that the Speaker of the Lok Sabha has ceased to maintain the impartial attitude necessary to command the confidence of all sections of the House; that, in his partisan conduct, he disregards the rights… pic.twitter.com/VDUK0iItox
— Congress (@INCIndia) March 10, 2026