महिला किसानों को कानूनी मान्यता देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पोर्टल शुरू किया
महिला किसानों को कानूनी मान्यता देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पोर्टल शुरू किया
मुंबई, 17 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने खेती और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में शामिल महिलाओं को किसान के रूप में कानूनी मान्यता देने वाले प्रमाणपत्र जारी करने के लिए बृहस्पतिवार को एक पोर्टल शुरू किया।
कृषि विभाग ने ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ के तहत महिला किसानों को आधिकारिक मान्यता देने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू की है।
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने एक बयान में कहा कि खेती के हर चरण में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन कृषि कार्यों में शामिल होने के बावजूद उन्हें अक्सर आधिकारिक तौर पर किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है।
उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम इस स्थिति को बदलेगा और महिलाओं के लिए आधिकारिक मान्यता, सरकारी योजनाओं का लाभ, कृषि ऋण, बीमा, कृषि आदान और विस्तार सेवाएं हासिल करना आसान बनाएगा।’’
राज्य विधानसभा के दोनों सदनों ने जुलाई की शुरुआत में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक’ को सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके साथ ही महाराष्ट्र जमीन के मालिकाना हक की परवाह किए बिना महिलाओं को स्वतंत्र किसान के रूप में कानूनी मान्यता देने वाला देश का पहला राज्य बना।
बाद में यह विधेयक अधिनियम में बदल गया और 22 जुलाई को लागू हुआ। इसमें महिला किसानों को आधिकारिक मान्यता देने, प्रमाणपत्र जारी करने और उनका आधिकारिक डेटाबेस तैयार करने का प्रावधान है।
अधिनियम के क्रियान्वयन के तहत बृहस्पतिवार से कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर महिला किसान प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है।
विभाग ने कहा कि किसी महिला को किसान के रूप में मान्यता देने का आधार केवल जमीन का मालिकाना हक नहीं होगा। खेती और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में उसकी वास्तविक भागीदारी को भी ध्यान में रखा जाएगा।
इस अभियान के दौरान पात्र महिला किसानों की पहचान की जाएगी, उन्हें प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, प्रशिक्षण दिया जाएगा और व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां चलाई जाएंगी।
विभाग ने पात्र महिला किसानों से आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
प्रेम

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