प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने पर मेटा ने माफी मांगी, सरकार नाखुश

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प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने पर मेटा ने माफी मांगी, सरकार नाखुश

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 09:29 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 09:29 PM IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 23 जुलाई की एक सोशल मीडिया पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने के मामले में मंगलवार को सरकार के सख्त रुख अपनाने के बाद वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा ने तकनीकी गलती मानते हुए माफी मांग ली।

हालांकि, सरकार ने मेटा के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताते हुए उसे मामले की विस्तृत जानकारी देने को कहा। इस संबंध में मेटा के वैश्विक लोक नीति प्रमुख को तलब किया गया था।

सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के मामले में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली है। हालांकि, सरकार कंपनी के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और उससे अधिक विस्तृत जानकारी मांगी है।

कृष्णन ने कहा, “यह अच्छी बात है कि उन्होंने माफी मांग ली है और अपनी गलती स्वीकार की। लेकिन हम उनके स्पष्टीकरण से खुश नहीं हैं। यह पर्याप्त नहीं है। हम इस पर और जानकारी चाहते हैं।”

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी की 23 जुलाई की एक पोस्ट फेसबुक पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित दिखी। इस पोस्ट में मोदी ने युवाओं से संवाद करते हुए परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों में कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

सोशल मीडिया पर वायरल एक स्क्रीनशॉट में यह संदेश दिखा कि उक्त सामग्री ‘कानूनी अनुरोध के कारण आपके क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है।’ इससे पोस्ट को लेकर विवाद और बढ़ गया।

सरकारी सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मेटा ने इस घटना के लिए अपने स्वचालित एआई आधारित कंटेंट फिल्टर में आई तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है। कंपनी ने बताया कि प्रधानमंत्री का पोस्ट गलती से हटा दिया गया था जिसे बाद में बहाल कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, फेसबुक एवं इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनी मेटा ने यह प्रस्ताव भी दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बड़ी हस्तियों के खातों को विशेष सुरक्षा दायरे (रिंगफेंस) में रखा जाएगा।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि केवल ‘तकनीकी गड़बड़ी’ का हवाला देना पर्याप्त नहीं है और मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सरकार का मानना है कि यदि मेटा की कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित प्रणाली में खामी है, तो उसे अपने तकनीकी ढांचे में तेजी से सुधार करना चाहिए।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया मंचों को भारतीय कानूनों का सख्ती से पालन करना होगा।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से सामग्रियों पर नजर और डिजिटल मंच की जवाबदेही से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि मेटा की वैश्विक टीमों को भारत सरकार की चिंताओं से अवगत कराया जाना चाहिए और स्थानीय टीमों को बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना होगा।

पिछले कुछ सप्ताह में मेटा कई नियामकीय मुद्दों को लेकर सरकार के रडार पर रही है। इससे पहले सरकार ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी क्योंकि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और पहचान की चोरी का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक सामग्री को लेकर भी कंपनी को नोटिस जारी किया गया था।

इस बीच, संसद की एक समिति ने भी सोशल मीडिया मंचों के नियमन पर चर्चा के लिए मेटा सहित प्रमुख कंपनियों और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों को तीन अगस्त को तलब किया है। एआई युग में डिजिटल मंचों की भूमिका बढ़ने के साथ ही उनकी जवाबदेही, पारदर्शिता और उपयोगकर्ता अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।

साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि सोशल मीडिया मंच भारतीय कानूनों को हल्के में नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियां बार-बार तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय