एक लाख रुपये से अधिक के सूक्ष्म-वित्त ऋण का वितरण जून तिमाही में 90 प्रतिशत बढ़ा: रिपोर्ट

एक लाख रुपये से अधिक के सूक्ष्म-वित्त ऋण का वितरण जून तिमाही में 90 प्रतिशत बढ़ा: रिपोर्ट

एक लाख रुपये से अधिक के सूक्ष्म-वित्त ऋण का वितरण जून तिमाही में 90 प्रतिशत बढ़ा: रिपोर्ट
Modified Date: August 11, 2026 / 09:40 pm IST
Published Date: August 11, 2026 9:40 pm IST

मुंबई, 11 अगस्त (भाषा) सूक्ष्म-वित्त क्षेत्र में एक लाख रुपये से अधिक के कर्ज का वितरण जून तिमाही में सालाना आधार पर 89.8 प्रतिशत बढ़ गया। यह बड़े मूल्य के कर्ज की तरफ लोगों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है। एक रिपोर्ट में मंगलवार को यह जानकारी दी गई।

क्रिफ हाई मार्क की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में 80,000 रुपये से एक लाख रुपये तक के कर्ज के वितरण में 79 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी तरफ 30,000 रुपये से कम के कर्ज में 35 प्रतिशत और 30,000 से 50,000 रुपये के कर्ज वितरण में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई।

नियामकीय परिभाषा के तहत, तीन लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला कर्ज सूक्ष्म-वित्त ऋण की श्रेणी में आता है।

रिपोर्ट कहती है कि एक लाख रुपये से अधिक के 77 प्रतिशत से ज्यादा कर्ज ऐसे मौजूदा कर्जदारों को दिए गए, जिनका उसी कर्जदाता के पास पहले से कर्ज था। इससे कर्जदाताओं द्वारा परिसंपत्ति गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का संकेत मिलता है।

क्रिफ हाई मार्क ने कहा कि 40,000 से 80,000 रुपये का कर्ज खंड देशभर में प्रमुख बना हुआ है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों में कुल नए कर्ज वितरण में इसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में प्रति कर्ज औसत राशि करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 32,400 रुपये हो गई, जो बेहतर कर्जदार प्रोफाइल के आधार पर बड़े मूल्य के कर्ज वितरण को दर्शाती है।

जून तिमाही में कुल सूक्ष्म-वित्त कर्ज वितरण सालाना आधार पर 18.6 प्रतिशत बढ़कर 61,100 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, मौसमी प्रभाव के कारण यह पिछली तिमाही की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम था।

कुल बकाया कर्ज सालाना आधार पर सात प्रतिशत घटकर 3.33 लाख करोड़ रुपये रह गया, जबकि तिमाही आधार पर इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

परिसंपत्ति की गुणवत्ता के मोर्चे पर, एक से 180 दिन तक बकाया कर्ज का अनुपात जून में घटकर 2.3 प्रतिशत रह गया, जो मार्च में 2.6 प्रतिशत और पिछले साल जून में 7.1 प्रतिशत था।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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