दस हजार करोड़ रुपये के कारोबार वाली मोबाइल फोन कंपनियां विनिर्माण योजना के लिए पात्र: सरकार

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दस हजार करोड़ रुपये के कारोबार वाली मोबाइल फोन कंपनियां विनिर्माण योजना के लिए पात्र: सरकार

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 05:38 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 05:38 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) अनुबंध पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों समेत बीते वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली मोबाइल फोन कंपनियां विनिर्माण योजना के तहत लाभ पाने के लिए पात्र होंगी। सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

शुक्रवार को जारी 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) के दिशानिर्देशों के अनुसार, 51 प्रतिशत भारतीय स्वामित्व वाली ईएमएस (इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाएं देने वाली) कंपनियों समेत मोबाइल फोन कंपनियां वित्त वर्ष 2025-26 में 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने पर भी योजना में भाग लेने की पात्र होंगी।

इस योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। इनमें मोबाइल फोन विनिर्माण को प्रोत्साहन देना और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड को समर्थन देना है।

एमपीएमएस का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन के विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन राशि के रूप में सहायता प्रदान करना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यह योजना चालू वित्त वर्ष से शुरू होकर पांच साल तक चलेगी। बहुलांश भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों को एक साल की तैयारी अवधि दी जा सकती है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना आज (शुक्रवार) से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। यह एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगी।’’

दिशानिर्देशों के तहत, मौजूदा ब्रांड को योजना के तहत लाभ पाने के लिए हर साल वित्त वर्ष 2025-26 के कुल कारोबार से कम से कम 5,000 करोड़ रुपये अधिक की बिक्री का न्यूनतम स्तर हासिल करना होगा।

इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2026-27 में वित्त वर्ष 2025-26 के कारोबार से अधिक की बिक्री का न्यूनतम स्तर 5,000 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2027-28 में 10,000 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2028-29 में 15,000 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2029-30 में 20,000 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2030-31 में 25,000 करोड़ रुपये होगा।

किसी नए ब्रांड को योजना के तहत लाभ के लिए तभी पात्र माना जाएगा, जब वह भारत में सालाना कुल 10,000 करोड़ रुपये की बिक्री हासिल कर ले।

योजना को एक परियोजना प्रबंधन एजेंसी के माध्यम से लागू किया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन से जुड़े दिशानिर्देश इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय अलग से जारी करेगा।

भाषा योगेश रमण

रमण