त्रीसा-गायत्री की जोड़ी सेमीफाइनल में, विश्व चैंपियनशिप में पदक पक्का किया

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त्रीसा-गायत्री की जोड़ी सेमीफाइनल में, विश्व चैंपियनशिप में पदक पक्का किया

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 05:09 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 05:09 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) भारत की त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने शुक्रवार को यहां पहला गेम गंवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए महिला युगल क्वार्टर फाइनल में चीन की जिया यी फैन और झांग शू जियान को हराकर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में पदक पक्का किया।

भारत की गैर-वरीयता प्राप्त जोड़ी ने एक घंटे नौ मिनट तक चले मैच में 16-21 21-15 21-13 से जीत हासिल की। उन्होंने अंतिम चार में पहुंचकर अपने लिए कम से कम कांस्य पदक पक्का कर लिया।

भारत ने पिछली बार 2011 में महिला युगल में विश्व चैंपियनशिप में पदक जीता था। तब ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने लंदन में कांस्य पदक हासिल किया था।

गायत्री ने कहा, ‘‘हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे। लेकिन पहले गेम के बाद हमने अपनी रणनीति बदल दी। शुरुआत में यह थोड़ा मुश्किल था। लेकिन हम संयमित रहे और जीत हासिल करने में कामयाब रहे। ’’

त्रीसा ने दबाव वाली स्थितियों से निपटने में मदद के लिए मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद की शांत बने रहने की सलाह को श्रेय दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘वह हमेशा कहते हैं कि बस शांत रहो और वर्तमान पल में रहो। मुझे लगता है कि आज इसने सही में काम किया। मुझे लगता है कि हमें इसी तरह की सलाह मिली थी। ’’

गायत्री ने कहा कि किसी खास प्रतिद्वंद्वी को निशाना बनाने की कोई विशेष योजना नहीं थी, लेकिन उन्होंने कहा कि वे जानबूझकर अपने पैरों को चलाए रखने और धैर्य बनाए रखने की कोशिश कर रही थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ था। हम अपनी रणनीति के बारे में बहुत कुछ बताना नहीं चाहते। मुझे लगता है कि हम बस रोटेट कर रहे थे। हम बस चाहते थे कि हमारे पैर चलते रहें और हम कोर्ट पर शांत रहें। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘यही सबसे महत्वपूर्ण बात है क्योंकि वे विश्व रैंकिंग में चौथे या पांचवें नंबर पर हैं। इसलिए वे आसानी से अंक नहीं देने वाली थी। इसलिए हम बस धैर्य रखना चाहते थे। यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है। ’’

भारतीय जोड़ी ने घरेलू दर्शकों के अपार समर्थन के बीच पहला गेम हारने के बाद बेहतर स्मैश और साफ-सुथरे नेट प्ले के दम पर मैच का रुख पलट दिया।

भारतीय टीम इस मैच में चीन की प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ 0-3 के रिकॉर्ड के साथ उतरी थी।

त्रीसा और गायत्री शुरुआत में 1-6 से पिछड़ गईं, लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार छह अंक हासिल करके स्कोर 8-9 कर दिया। चीन की टीम ने हालांकि इंटरवल तक तीन अंक की बढ़त बना ली थी।

भारतीय जोड़ी ने अपना संघर्ष जारी रखा और कुछ बेहतरीन रैलियों के बाद 13-15 के स्कोर पर चीनी खिलाड़ियों के करीब पहुंच गई। हालांकि झांग और जिया ने 17-14 की बढ़त हासिल करने के बाद पहला गेम जीत लिया।

झांग और जिया ने दूसरे गेम में भी अपनी लय बरकरार रखी और पहले 5-1 और फिर 10-7 से बढ़त ले ली। भारतीय जोड़ी ने हालांकि जोरदार वापसी करते हुए स्कोर 13-10 कर दिया।

मुकाबला काफी कड़ा रहा और एक समय स्कोर 15-14 तक पहुंच गया लेकिन भारतीय जोड़ी ने जल्द ही 19-14 की बढ़त बना ली और मैच को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।

तीसरे और निर्णायक गेम में त्रीसा और गायत्री ने आक्रामक शुरुआत करते हुए 11-5 की बढ़त हासिल की और फिर लगातार तीन अंक जीतकर इसे 14-7 तक पहुंचा दिया।

भारतीय जोड़ी ने इसके बाद कुछ गलतियों के कारण अंक गंवाए लेकिन यह सिलसिला लंबे समय तक नहीं चला और उन्होंने 17-9 की बढ़त बना ली।

गायत्री और जिया व झांग के बीच तीखी नोकझोंक मैच के मुख्य आकर्षणों में से एक थी। भारतीय जोड़ी ने इसके बाद नौ मैच प्वाइंट हासिल किए।

जिया और झांग ने दो मैच प्वाइंट बचाए, लेकिन वह भारतीय टीम को जीत हासिल करने से नहीं रोक पाई। त्रीसा जश्न मनाते हुए कोर्ट पर गिर पड़ीं, जबकि गायत्री को विश्वास नहीं हो रहा था कि उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में पदक पक्का कर लिया है।

इससे पहले, त्रीसा और गायत्री 2022 और 2023 में ऑल इंग्लैंड ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं। उन्होंने 2022 में राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक भी जीता और पिछले साल की शुरुआत में शीर्ष 10 में जगह बनाई।

हालांकि इस साल की शुरुआत में एशिया बैडमिंटन चैंपियनशिप और उबर कप से पहले ट्रेनिंग के दौरान त्रीसा के टखने में चोट लग गई।

फिर ‘रिहैबिलिटेशन (चोट से उबरने की प्रक्रिया)’ के बाद त्रीसा और गायत्री ने इंडोनेशिया ओपन में वापसी की और फिर अमेरिका ओपन में खेलीं जिसके बाद इस महीने की शुरुआत में उन्होंने फिलीपीन इंटरनेशनल चैलेंज जीता।

भाषा पंत

नमिता आनन्द

आनन्द