नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) देश में सौर उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार 2030 तक करीब 30 गीगावाट की पॉलीसिलिकॉन विनिर्माण क्षमता जोड़ने पर विचार कर रही है। इससे करीब 25,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि धातुकर्म-ग्रेड सिलिकॉन के साथ एक गीगावाट क्षमता का पॉलीसिलिकॉन संयंत्र स्थापित करने में करीब 850 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी।
सारंगी ने ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस (बीएनईएफ) सम्मेलन से इतर कहा कि सरकार देश में सौर विनिर्माण के प्रमुख उत्पाद पॉलीसिलिकॉन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित योजना पर काम कर रही है।
उन्होंने 2030 तक आवश्यक पॉलीसिलिकॉन क्षमता के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विनिर्माण क्षमता में मजबूती बनाए रखने के लिए 30 गीगावाट या उससे अधिक क्षमता देश के लिए उचित होगी। इसलिए हम 2030 तक कम से कम 30 गीगावाट क्षमता जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।’’
अधिकारी ने कहा कि पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल और मॉड्यूल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की गई है। हालांकि, इस पहल के तहत पॉलीसिलिकॉन की बहुत कम क्षमता ही आने की संभावना है।
सारंगी ने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा कि भारत को इससे कहीं अधिक क्षमता की जरूरत है और सरकार पॉलीसिलिकॉन के विनिर्माण को समर्थन देने वाली योजना पर काम कर रही है।
भाषा
योगेश रमण
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