मोनाको की कंपनी का पानी आधारित तकनीक से ईंधन खपत में 10 प्रतिशत तक बचत का दावा

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मोनाको की कंपनी का पानी आधारित तकनीक से ईंधन खपत में 10 प्रतिशत तक बचत का दावा

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  • Publish Date - May 17, 2026 / 02:11 PM IST,
    Updated On - May 17, 2026 / 02:11 PM IST

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) वैश्विक तेल बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच देश के बढ़ते ईंधन आयात बिल और रुपये की कमजोरी से निपटने के लिए मोनाको स्थित ईंधन प्रौद्योगिकी कंपनी ने एक अनोखा समाधान पेश किया है।

कंपनी का दावा है कि ‘पानी’ की मदद से ईंधन की भारी बचत की जा सकती है।

ईंधन प्रौद्योगिकी कंपनी ‘फोवे इको सॉल्यूशंस’ ने दावा किया है कि उसकी पेटेंटे वाली ‘कैविटेक ईंधन इमल्शन’ प्रौद्योगिकी के जरिये उद्योग अपने ईंधन की खपत में 10 प्रतिशत तक की कटौती कर सकते हैं।

कंपनी के अनुसार, इससे न केवल हानिकारक उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, बल्कि इंजन में बिना किसी बदलाव या संयंत्रों को बंद किए बिना उपकरणों के प्रदर्शन में भी सुधार होगा।

भारत इस समय अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। साथ ही, सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर आम उपभोक्ताओं पर कम करने के लिए भारी लागत वहन कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उद्योगों से ईंधन बचाने की अपील कर चुके हैं।

कंपनी का कहना है कि उसकी प्रौद्योगिकी इसी जरूरत को पूरा कर सकती है।

एफओडब्ल्यूई के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हेमंत सोंधी के अनुसार, इस प्रौद्योगिकी में “कंट्रोल्ड कैविटेशन टेक्नोलॉजी (सीसीटी)” का उपयोग किया जाता है, जिससे ईंधन और पानी का सूक्ष्म मिश्रण बनाया जाता है और ईंधन में पानी की बेहद छोटी बूंदें मिलाई जाती हैं, बिना किसी रासायनिक पदार्थ के।

जब यह मिश्रण जलता है, तो ये पानी की बूंदें इंजन के अंदर सूक्ष्म विस्फोट पैदा करती हैं। इसके परिणामस्वरूप ईंधन पूरी तरह और अधिक कुशलता से जलता है।

कंपनी और स्वतंत्र परीक्षणों के अनुसार इससे ईंधन की खपत कम होती है, दहन (जलने की प्रक्रिया) साफ होता है और प्रदूषण भी घटता है।

कंपनी के मुताबिक, डेनमार्क की अल्फा लावल प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में बॉयलर में 6.3 प्रतिशत और समुद्री जहाजों के इंजन में 8.7 प्रतिशत तक ईंधन बचत दर्ज की गई।

भारत में भी रिफाइनरी, इस्पात संयंत्र, बिजली संयंत्र और औद्योगिक भट्टियों में परीक्षण किए गए हैं।

एक इस्पात संयंत्र में परीक्षण के दौरान ईंधन की खपत में पांच प्रतिशत की कमी और प्रदूषण में 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। एक सरकारी रिफाइनरी में कैप्टिव बिजली इकाई में 3.6 प्रतिशत तक ईंधन बचत की पुष्टि हुई।

भाषा योगेश अजय

अजय