नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी अंबुजा सीमेंट ने अपनी विस्तार परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी स्वीकार करते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उसका पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) ‘मध्यम’ स्तर पर रहेगा। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के लिए 6,000-6,500 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह लगभग 7,500 करोड़ रुपये था।
कंपनी के निदेशक करण अदाणी ने तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों के साथ हुई बातचीत में कहा कि सीमेंट कारोबार में परियोजनाओं के कार्यान्वयन का स्तर समूह की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया है। इसके पीछे ठेकेदारों से जुड़ी समस्याएं, मजबूत निष्पादन टीम की कमी और अधूरी इंजीनियरिंग योजनाएं प्रमुख कारण रहीं।
उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल ‘रुककर सुधार’ की रणनीति अपना रही है और नई परियोजनाएं शुरू करने से पहले मौजूदा परियोजनाओं को पूरा करना चाहती है। अदाणी ने माना कि कुछ मामलों में सही ठेकेदारों का चयन नहीं हो पाया, जिससे परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई।
अदाणी ने कहा कि एसीसी और अंबुजा सीमेंट के अधिग्रहण के बाद समूह के पास तैयार परियोजना निष्पादन टीम नहीं थी। ऐसी टीम तैयार करने और आंतरिक क्षमताएं विकसित करने में समय लगा।
उन्होंने यह भी बताया कि कई परियोजनाएं पूरी इंजीनियरिंग योजना तैयार होने से पहले ही शुरू कर दी गई थीं। अब कंपनी ने निर्णय लिया है कि नई परियोजनाओं पर काम शुरू करने से पहले छह महीने तक इंजीनियरिंग तैयारियों को पूरा किया जाएगा।
अदाणी ने कहा, “हम पहले इंजीनियरिंग का पूरा काम खत्म करेंगे और उसके बाद ही नई परियोजनाएं शुरू करेंगे। हमें भरोसा है कि अब हम तय समयसीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा कर पाएंगे।”
भविष्य की विस्तार रणनीति पर उन्होंने कहा कि कंपनी अधिग्रहण के अवसरों का मूल्यांकन करती रहेगी, लेकिन उसकी प्राथमिकता अपनी परियोजनाओं के विस्तार पर होगी।
अंबुजा सीमेंट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनोद बेहेटी ने कहा कि अधिग्रहीत इकाइयों के पुनर्गठन और सुधार की प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले रही है, जिससे लागत बढ़ी है।
बेहेटी के अनुसार, परिचालन संबंधी बाधाएं मुख्य रूप से अधिग्रहीत परिसंपत्तियों में देखने को मिलीं, खासकर पेन्ना और सांघी इंडस्ट्रीज के संयंत्रों में, जहां बड़े स्तर पर व्यवधान उत्पन्न हुए।
भाषा अजय अजय
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