नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) देश के सेवा क्षेत्र के उत्पादन को मापने वाले नये सूचकांक का आधार वर्ष 2024-25 होगा और इसे हर महीने 60 दिन के अंतराल पर जारी किया जाएगा। सांख्यिकी मंत्रालय ने बुधवार को अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) की एक सूची में यह कहा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल 2026 के लिए पहला सेवा उत्पादन सूचकांक (आईएसपी) 14 जुलाई को घोषित किया जाएगा। इसके बाद के आंकड़े हर महीने की 29 तारीख ( अवकाश होने पर अगले कामकाजी दिन) को जारी किए जाएंगे।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि औद्योगिक क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को मापने वाले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की तरह आईएसपी सेवा क्षेत्र की वृद्धि में अल्पकालिक बदलावों को मापने के लिए एक नया वृहद आर्थिक संकेतक होगा।
आईएसपी तैयार करने के लिए तौर-तरीके एक तकनीकी परामर्श समिति के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया गया था। इस समिति का गठन मई, 2025 में किया गया था और इसकी अध्यक्षता नीति आयोग की देबजानी घोष ने की थी। तकनीकी परामर्श समिति में शिक्षा क्षेत्र और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा, सेवा क्षेत्र के मंत्रालयों/विभागों के सदस्य भी शामिल हैं।
आईएसपी में थोक और खुदरा व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, होटल और रेस्तरां, रियल एस्टेट, पेशेवर, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं, कला, मनोरंजन आदि जैसे कई उप-क्षेत्र शामिल होंगे।
इसके अलावा स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं जैसे दो उप-क्षेत्रों को भी आईएसपी रूपरेखा में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसे निगमित सेवा क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के बाद शामिल किया जाएगा।
मंत्रालय ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में बताया है कि आईएसपी एक अल्पकालिक संकेतक है। इसे एक तय आधार अवधि की तुलना में सेवा क्षेत्र के उत्पादन की मात्रा में समय के साथ होने वाले बदलावों को मापने के लिए बनाया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि यह सूचकांक समय के साथ अलग-अलग तरह के सेवा उद्योग के वास्तविक उत्पादन में होने वाले बदलावों को मापता है।
मंत्रालय आईएसपी के लिए तीन मुख्य आंकड़ा स्रोतों…प्रशासनिक आंकड़ा, जीएसटी रिटर्न और निगमित सेवा क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण…का उपयोग करेगा।
भाषा रमण अजय
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