मुजफ्फरपुर में विकसित हुई कैंसर मरीज के देखभाल करने वाली मोबाइल आधारित सहायता प्रणाली

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मुजफ्फरपुर में विकसित हुई कैंसर मरीज के देखभाल करने वाली मोबाइल आधारित सहायता प्रणाली

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 06:29 PM IST

मुजफ्फरपुर, 24 जून (भाषा) बिहार के मुजफ्फरपुर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (एचबीसीएच एंड आरसी) ने कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों की देखभाल करने वाले परिजनों की सहायता के लिए ‘कैंसर केयरगिवर सपोर्ट सिस्टम’ (सीसीएसएस) विकसित किया है।

यह कम लागत वाली मोबाइल आधारित सहायता प्रणाली देखभालकर्ताओं को ऑपरेशन के बाद की देखभाल, पोषण, स्वच्छता, पुनर्वास तथा लक्षणों के प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई है।

एचबीसीएच एंड आरसी के निदेशक कुमार प्रभाष ने कहा, “सीसीएसएस जैसी पहलें देखभालकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देती हैं और उन्हें आवश्यक जानकारी एवं सहयोग प्रदान करती हैं। इससे उपचार के प्रति मरीजों की प्रतिबद्धता, जीवन की गुणवत्ता तथा कैंसर उपचार के समग्र परिणामों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।”

उन्होंने कहा कि कैंसर उपचार की व्यवस्था अब अधिक मरीज-केंद्रित और परिवार को साथ लेकर चलने वाले दृष्टिकोण की ओर बढ़ रही है।

शोध दल की सदस्य तथा ‘हेड एंड नेक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी’ विभाग की मेघना कुमार ने कहा, “कैंसर सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी जारी रहती है, जहां देखभालकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। हमारा उद्देश्य उन्हें सरल और विश्वसनीय जानकारी देकर सशक्त बनाना है, ताकि वे मरीजों की रिकवरी के दौरान आत्मविश्वास के साथ सहयोग कर सकें।”

शोध दल के एक अन्य सदस्य, एसोसिएट प्रोफेसर एवं सर्जन बुरहानुद्दीन कय्यूमी ने इस पहल को ‘‘सार्थक’’ बताते हुए कहा कि यह टीम के सदस्यों के ईमानदार प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “घर पर उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाना न केवल सार्थक है, बल्कि इससे कैंसर मरीजों के समग्र उपचार प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। यह उपकरण उसी दिशा में किया गया एक गंभीर प्रयास है।”

एचबीसीएच एंड आरसी के एक बयान के अनुसार, इस प्रणाली को विकसित करने वाली शोध टीम के निष्कर्षों से पता चला कि सीसीएसएस का उपयोग करने वाले देखभालकर्ताओं में तनाव और जिम्मेदारियों का बोझ उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया।

बयान में कहा गया कि इस कार्यक्रम से जुड़े मरीजों को अस्पताल में अनियोजित अनुवर्ती (फॉलो-अप) यात्राओं की आवश्यकता भी कम पड़ी।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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