आरबीआई ‘देखो और इंतजार करो’ की स्थिति में, रेपो दर बढ़ाने पर चर्चा अभी जल्दबाजी: मल्होत्रा

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आरबीआई ‘देखो और इंतजार करो’ की स्थिति में, रेपो दर बढ़ाने पर चर्चा अभी जल्दबाजी: मल्होत्रा

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 06:17 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 06:17 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रख रहा है और इस समय नीतिगत ब्याज दर में वृद्धि के बारे में बातचीत करना जल्दबाजी होगी।

उन्होंने समाचार चैनल ‘ईटी नाउ’ से कहा, ‘‘अगर हम सही में उन्हें (बाजार) नीतिगत दर बढ़ाने के लिए तैयार करना चाहते, तो हमें अपना रुख बदलना होगा…। अगर यह पक्का होता कि हम आने वाले महीनों में दर बढ़ाने वाले हैं, तो हम अपना ‘तटस्थ’ रुख को बदलकर ‘सख्त’ कर लेते? लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, मुझे लगता है कि नीतिगत दर बढ़ाने के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी। हमने बस इतना कहा है कि हम सतर्क हैं। हमें पता है कि महंगाई और वृद्धि, दोनों के मामले में जोखिम हो सकते हैं। खासकर महंगाई पर, क्योंकि यह ऊपरी सीमा के करीब पहुंच रही है…। हम सतर्क हैं और आंकड़ों पर नजर रखेंगे।’’

उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में, आरबीआई ने पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण वृद्धि और महंगाई पर बढ़ते जोखिमों के बीच अपनी नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

मौद्रिक नीति समिति ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और ‘तटस्थ’ रुख को कायम रखने का निर्णय किया।

केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने वृद्धि अनुमान को कम किया है और 2026-27 में वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो अप्रैल के 6.9 प्रतिशत के अनुमान से कम है। यह अनुमान 2025-26 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत से भी कम है।

आरबीआई ने 2026-27 के लिए महंगाई बढ़कर 5.1 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है जो पहले के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है।

मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव में कमी पूरी दुनिया और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक बात है। यह वृद्धि और महंगाई, दोनों के लिए अच्छी खबर है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं और यूरिया की कीमतें भी काफी घटी हैं। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिली है।

मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और सरकार और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने मिलकर ऊर्जा के दाम में तेजी के असर को काफी हद तक कम किया। सभी महत्वपूर्ण आंकड़ें (जीएसटी संग्रह, बिजली खपत, ई-वे बिल, पीएमआई आदि) यह दिखाते हैं कि भारत ने बहुत अनिश्चित समय में भी इस झटके का अच्छी तरह से सामना किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि हमने अपनी मौद्रिक नीति में कहा है कि हम ‘देखो और इंतजार करो’ की स्थिति में हैं। देखते हैं कि यह युद्धविराम कब तक चलता है और उसके आगे हम सभी के लिए बेहतर समय है।’’

मल्होत्रा ने कहा कि हालांकि जोखिम कम हुए हैं, लेकिन नीति निर्माता अभी महंगाई परिदृश्य पर कोई ठोस नतीजा निकालने के लिए तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जोखिम निश्चित रूप से कम हुए हैं, लेकिन हमें…इंतजार करना होगा और देखना होगा कि कच्चे तेल की कीमतें आखिर कहां जाकर रुकती हैं।’’

महंगाई पर गवर्नर ने कहा कि आरबीआई बारीकी से नजर रख रहा है कि क्या ईंधन की वजह से थोक कीमतों पर बना दबाव पूरी अर्थव्यवस्था में फैल रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘सच कहूं तो हमें पक्का नहीं पता कि दूसरे दौर का प्रभाव होगा या नहीं। अगर हमें पक्का पता होता, तो मौद्रिक नीति समिति ने कोई कदम उठाया होता।’’

मल्होत्रा ने कहा कि अभी तक केंद्रीय बैंक को महंगाई के व्यापक रूप लेने का कोई सबूत नहीं मिला है।

रिजर्व बैंक कच्चे तेल की कीमतों के अलावा, मानसून की प्रगति पर भी नजर रख रहा है, जो आने वाले महीनों में महंगाई की चाल पर असर डाल सकता है।

मल्होत्रा ​​ने कहा, ‘‘दोनों ही अनिश्चित हैं। दोनों का महंगाई पर असर पड़ता है। और इसलिए हम…दोनों पर नजर रखेंगे।’’

भाषा रमण अजय

अजय