नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने जून में समाप्त हुए तीन माह में 78 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी। इन मामलों कुल 5,517.66 करोड़ रुपये की रकम शामिल थी।
न्यायाधिकरण ने एक रिपोर्ट में कहा कि यह ‘‘दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (आईबीसी) के लागू होने के बाद से यह पहली बार है जब किसी तिमाही में इतनी संख्या में समाधान योजनाओं को मंजूरी दी गयी है।’’
आईबीसी दबाव वाली संपत्ति के लिए समय-सीमा के भीतर और बाजार से जुड़े समाधान की व्यवस्था करता है और अंतिम समाधान को न्यायाधिरण मंजूरी देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में न्यायाधिकरण ने 78 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी। इनमें कुल 5,517.66 करोड़ रुपये की रकम शामिल थी।
न्यायाधिकरण ने इस साल 30 जून तक 1,628 समाधान योजनाओं को मंजूरी दी है। इन मामलों में कुल मंजूर मूल्य 4.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
वेबसाइट पर मौजूद रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘30 जून, 2026 तक, समाधान योजना की मंजूरी के लिए 349 आवेदन एनसीएलटी की अलग-अलग पीठ के समक्ष लंबित थे। वहीं 38 मामलों की सुनवाई हो चुकी थी और उन पर आदेश सुरक्षित रख लिए गए थे।’’
प्रधान पीठ और नयी दिल्ली पीठ के अलावा, न्यायाधिरण की इलाहाबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, कटक, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, कोच्चि और मुंबई में भी पीठ हैं।
न्यायाधिकरण ने 13 जुलाई तक एक अध्यक्ष, 26 न्यायिक सदस्य और 25 तकनीकी सदस्य कार्यरत थे
न्यायाधिकरण के लिए मंजूर की गई क्षमता एक अध्यक्ष, 31 न्यायिक सदस्य और 31 तकनीकी सदस्यों की है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘जनवरी, 2025 के बाद से न्यायिक या तकनीकी सदस्य की कोई नियुक्ति नहीं की गई है। इस दौरान एकमात्र नियुक्ति न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की एनसीएलटी के अध्यक्ष के तौर पर हुई थी।’’
भाषा रमण अजय
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