नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि देश की ऊर्जा और खनिज सुरक्षा को मजबूत करने के लिए घरेलू प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने की जरूरत है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित होने और भारत के ऊर्जा आयात पर असर पड़ने के बीच उन्होंने यह बात कही।
अग्रवाल ने सोशल मीडिया मंच पर लिखा है कि वैश्विक संघर्ष का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो आयात पर निर्भर हैं। इसलिए भारत को विदेशी संसाधनों पर निर्भरता कम कर घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता हासिल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह दुखद है कि भारत उस युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव झेल रहा है, जिससे उसका कोई संबंध नहीं है।’’
अग्रवाल ने कहा कि भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश लगभग 90 प्रतिशत तेल, 95 प्रतिशत तांबा और 99.5 प्रतिशत सोना आयात करता है जबकि भारत की भूगर्भीय संरचना प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है।
खनिज, धातु एवं तेल उद्योग में चार दशकों से अधिक के अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि इन संसाधनों का कुशलता से विकास किया जाए तो आयात निर्भरता कम हो सकती है। साथ ही रोजगार, उद्योग एवं निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वह 19 वर्ष की उम्र में बिहार से मुंबई आए थे और काफी नीचे से शुरू कर आज वेदांता को इस मुकाम पर पहुंचाया है।
समूह ने इस दौरान कई बड़े परिसंपत्तियों का अधिग्रहण किया है जिनमें हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को), केयर्न इंडिया का तेल-गैस कारोबार और सेसा गोवा आयरन ओर शामिल हैं।
अग्रवाल ने कहा कि इन परिसंपत्तियों के संचालन में सुधार से निजी क्षेत्र की क्षमता का पता चलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमने जस्ता उत्पादन को 10 गुना और एल्युमिनियम उत्पादन को 20 गुना बढ़ाया। इसके परिणामस्वरूप इन मूल्य श्रृंखलाओं के आसपास 1,000 से अधिक कंपनियां विकसित हुईं।’’
उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्ष में वेदांता ने राष्ट्रीय खजाने में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि तेल एवं गैस क्षेत्र में कंपनी का लक्ष्य प्रतिदिन 10 लाख बैरल उत्पादन का है जबकि लौह अयस्क उत्पादन को 10 करोड़ टन तक ले जाने की योजना है जो भारत के मौजूदा उत्पादन का लगभग एक-तिहाई होगा।
उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर की खनन कंपनियां विकसित करने की जरूरत है।
अग्रवाल ने साथ ही कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए नीतिगत सुधार और नियामकीय सोच में बदलाव जरूरी है। उन्होंने सरल नियम, कंपनियों पर अधिक भरोसा तथा लंबे अनुमोदनों और मुकदमों की बजाय स्व-प्रमाणन एवं ऑडिट आधारित निगरानी की व्यवस्था की वकालत की।
उन्होंने कहा, ‘‘ व्यवस्था को बाधाएं उत्पन्न करना बंद करना होगा। कंपनियों को मान्यता एवं सम्मान की आवश्यकता है और संदेह का लाभ उद्यमियों को ही मिलना चाहिए।’’
भाषा निहारिका रमण
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