नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अधिकारियों के संगठन ने श्रम एवं रोजगार मंत्री से ‘केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली’ (सीआईटीईएस) को मजबूत करने और तकनीकी विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
ईपीएफओ अधिकारी संघ ने श्रम मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि नई प्रणाली का उद्देश्य अधिकांश मामलों में दो-तीन दिन में दावों का निपटान करना था, लेकिन अब कई मामलों में 20 दिन से अधिक की देरी हो रही है।
संगठन ने इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) ढांचे और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। पत्र के अनुसार, ईपीएफओ से जुड़े सदस्यों, पेंशनधारकों और उनके परिजनों को मिलाकर करीब 25-35 करोड़ लोग इससे प्रभावित होते हैं, लेकिन ढांचागत कमी के कारण समयबद्ध निपटान नहीं हो पा रहा है।
संघ ने कहा कि सूचना सेवा प्रभाग (आईएसडी) में 2004 के बाद कोई भर्ती नहीं हुई है और पिछले तीन वर्षों से पूर्णकालिक मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) की नियुक्ति भी लंबित है।
पत्र में कहा गया है कि बढ़ते कार्यभार के बावजूद स्टाफिंग मानक पुराने बने हुए हैं, जिससे खासकर महानगरों के कार्यालयों पर दबाव बढ़ा है।
संघ के अनुसार, सीआईटीईएस परियोजना जनवरी, 2023 में सी-डैक को सौंपी गई थी, जिसे 10 महीने में पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई। जुलाई, 2026 में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया, जिसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि ईपीएफओ में कार्यभार का अंतिम आकलन 2016-17 में हुआ था, जबकि संगठन का विस्तार इसके बाद तेजी से हुआ है।
संघ ने ईपीएफओ के सर्वोच्च निर्णायक निकाय केंद्रीय न्यासी मंडल (सीबीटी) से अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए आवश्यक नियुक्तियां करने और आईटी ढांचे को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
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