नया एमएसएमई विधेयक छोटे उद्यमों के लिए ला सकता है ‘आईबीसी जैसा प्रभाव’ : रिपोर्ट

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नया एमएसएमई विधेयक छोटे उद्यमों के लिए ला सकता है 'आईबीसी जैसा प्रभाव' : रिपोर्ट

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 08:08 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 08:08 PM IST

मुंबई, 17 अगस्त (भाषा) नए एमएसएमई कानून से छोटे कारोबारियों को वस्तुओं एवं सेवाओं के खरीदारों से समय पर भुगतान मिलने की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। इससे विलंबित भुगतान के मामलों में ‘आईबीसी जैसा प्रभाव’ भी देखने को मिल सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट में सोमवार को यह अनुमान जताया गया।

क्रिसिल की शाखा क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, खरीदारों में भुगतान अनुशासन बेहतर होने और छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी मुक्त होने से नया कानून विलंबित भुगतान के मामलों में ‘आईबीसी जैसा प्रभाव’ डाल सकता है।

आईबीसी कानून ने चूक की स्थिति में कर्जदारों को कंपनी का नियंत्रण खोने के जोखिम के जरिये बैंकों को फंसे कर्ज से निपटने में मदद की है।

संसद ने इस महीने ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इसमें भुगतान विवादों के समयबद्ध निपटारे और फैसलों के मजबूत क्रियान्वयन का प्रावधान है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अगस्त तक ‘एमएसएमई समाधान’ पोर्टल पर सूक्ष्म और लघु उद्यमों ने विलंबित भुगतान से जुड़े 2,56,892 आवेदन दायर किए थे, जिनमें 55,244 करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। इनमें 20,979 करोड़ रुपये के दावे अब भी लंबित हैं। करीब 40,580 आवेदन यानी 16 प्रतिशत एक साल से अधिक समय से लंबित हैं, जिससे बड़ी मात्रा में कार्यशील पूंजी फंसी हुई है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषण शर्मा ने कहा कि अलग-अलग चरणों में समयबद्ध विवाद निपटान, फैसलों को अधिक प्रभावी बनाने और सुविधा परिषदों की भूमिका मजबूत करने से ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ (एमएसएमई) क्षेत्र में भुगतान अनुशासन बेहतर हो सकता है।

संशोधित व्यवस्था के तहत मध्यस्थता पहली पेशी के लिए तय तारीख से 90 दिन के भीतर पूरी करनी होगी। मध्यस्थता विफल रहने पर 30 दिन के भीतर विवाद को पंचाट में भेजना होगा और दलीलें पूरी होने के 90 दिन के भीतर फैसला देना होगा।

विधेयक में सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसईएफसी) के फैसले को चुनौती देने वाले खरीदार के लिए फैसले की राशि का 75 प्रतिशत जमा करना भी प्रस्तावित है। यदि कार्यवाही छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है तो जमा राशि का कम-से-कम 50 प्रतिशत एमएसएमई को दिया जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रावधानों से चूक करने वाले खरीदारों के खिलाफ एमएसएमई की स्थिति मजबूत हो सकती है और फैसलों को बेवजह चुनौती देने के मामलों पर अंकुश लग सकता है।

भाषा प्रेम प्रेम योगेश

योगेश