नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) फुटबॉल के दीवाने ब्राजील में जोनाथन मातियास बैडमिंटन को खेल के नक्शे पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस 26 वर्षीय खिलाड़ी का सफर आसान नहीं रहा है और उन्होंने कभी बैडमिंटन को छोड़कर सेना में शामिल होने का फैसला किया था लेकिन अब विश्व चैंपियनशिप में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
मातियास विश्व चैंपियनशिप के पहले दौर में ही बाहर हो गए लेकिन इस प्रतियोगिता तक पहुंचना उनके लिए किसी जीत से कम नहीं था। आर्थिक तंगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के सीमित अवसरों के कारण उनका करियर कई बार प्रभावित हुआ।
वर्ष 2019 में ओलंपिक का सपना पूरा करने के लिए जरूरी टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने का खर्च नहीं जुटा पाने के कारण मातियास ने बैडमिंटन को कुछ समय के लिए छोड़कर सेना में शामिल होने का कठिन फैसला किया।
विश्व चैंपियनशिप के पहले दौर में हार के बाद पीटीआई वीडियो से बातचीत में मातियास ने कहा, ‘‘मैं बहुत निराश था क्योंकि मेरा एक सपना था लेकिन पैसे की वजह से मैं खेल नहीं पा रहा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास क्वालीफाई करने के लिए अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने के पैसे नहीं थे। इसलिए मैंने खेल छोड़कर सेना में शामिल होने का फैसला किया।’’
सेना में उनका कार्यकाल एक साल का रहा लेकिन इस दौरान भी बैडमिंटन उनके जेहन से दूर नहीं हुआ।
मातियास 2020 में प्रशिक्षण के लिए डेनमार्क गए और वहां करीब डेढ़ साल बिताने के बाद ब्राजील लौटकर अपना करियर फिर शुरू किया।
उनकी आर्थिक परेशानियां दक्षिण अमेरिका के खिलाड़ियों के सामने मौजूद व्यापक चुनौती को दर्शाती हैं। इस क्षेत्र में बैडमिंटन का सर्किट छोटा है और खेल के बड़े टूर्नामेंट मुख्य रूप से यूरोप और एशिया में आयोजित होते हैं।
मातियास ने कहा, ‘‘मैं टूर्नामेंटों को लेकर संघर्ष कर रहा हूं। हमारे पास इन बड़े टूर्नामेंटों में आकर खेलने के ज्यादा अवसर नहीं हैं।’’
भाषा सुधीर आनन्द
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