न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ व्यापार समझौते को मंजूरी दी
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ व्यापार समझौते को मंजूरी दी
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बुधवार को कहा कि देश की संसद ने भारत के साथ हुए ‘ऐतिहासिक’ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम मंजूरी दे दी है।
भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल को इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत न्यूजीलैंड भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क-मुक्त पहुंच देगा। इनमें कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते-चप्पल तथा रत्न एवं आभूषण जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं।
लक्सन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘लोगों ने मुझसे कहा था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं है। लेकिन आज उस समझौते को संसद में मतदान के बाद मंजूरी मिल गई…।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस समझौते से न्यूजीलैंड में अधिक रोजगार और लोगों की आय बढ़ेगी। साथ ही 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बाजार खुलने से न्यूजीलैंड के अधिक उत्पाद भारत में बेचे जा सकेंगे।’’
यह समझौता अगले महीने लागू होने की उम्मीद है।
भारत में दूसरे देशों या समूहों के साथ किए जाने वाले मुक्त व्यापार समझौतों को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलती है।
भारत को किसी व्यापार समझौते के तहत दूसरी बार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता मिली है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इससे पहले यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के चार देशों के समूह ने भारत के साथ समझौते में 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी।
व्यापार समझौते पर दिसंबर, 2025 में बातचीत पूरी हुई थी। समझौते के तहत न्यूजीलैंड, भारत के सभी उत्पाद और शुल्क श्रेणियों में निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच देगा। इसमें कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
फिलहाल न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, वाहन और वाहन कलपुर्जों समेत भारत के कुछ प्रमुख निर्यात उत्पादों पर अधिकतम 10 प्रतिशत तक शुल्क लगाता है।
इसके बदले भारत ने न्यूजीलैंड के विभिन्न शुल्क श्रणियों में आने वाले 70 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट की पेशकश की है। यह दोनों देशों के कुल व्यापार मूल्य के करीब 95 प्रतिशत के बराबर है। वहीं, 29.97 प्रतिशत उत्पाद श्रेणियों को समझौते से बाहर रखा गया है।
समझौते से बाहर रखे गए उत्पादों में डेयरी उत्पाद, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी, कृत्रिम शहद, पशु एवं वनस्पति वसा तथा तेल, हथियार एवं गोला-बारूद, रत्न एवं आभूषण, तांबा और उसके उत्पाद तथा एल्युमीनियम और उसके उत्पाद शामिल हैं।
भारत, न्यूजीलैंड से आने वाले कोकिंग कोयले, धातु के कचरे एवं कबाड़, लकड़ी, भेड़ के मांस और कच्ची खाल जैसे कुछ उत्पादों को शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा।
वहीं पेट्रोलियम तेल, वनस्पति तेल, कुछ विद्युत एवं यांत्रिक मशीनरी और पेप्टोन जैसे उत्पादों पर भारत तीन, पांच, सात और 10 वर्षों की अलग-अलग अवधि में चरणबद्ध तरीके से शुल्क कम करेगा।
न्यूजीलैंड के जिन उत्पादों पर शुल्क में कमी की जाएगी, उनमें शराब, दवाएं, पॉलिमर, एल्युमीनियम तथा लौह एवं इस्पात उत्पाद शामिल हैं।
मनुका शहद, सेब, कीवी फल और दूध से बने एल्ब्यूमिन जैसे कुछ उत्पादों के लिए भारत ने कोटा आधारित शुल्क रियायत की पेशकश की है। इसके साथ न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपाय भी रखे गए हैं, ताकि घरेलू किसानों के हितों की रक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण आयात और उपभोक्ताओं के लिए विकल्प सुनिश्चित किए जा सकें।
सेवा क्षेत्र में न्यूजीलैंड ने कंप्यूटर, पेशेवर सेवाओं, दृश्य-श्रव्य, दूरसंचार, निर्माण, शिक्षा, पर्यावरण, वित्तीय सेवाओं तथा पर्यटन एवं यात्रा समेत करीब 118 क्षेत्रों में भारत को बाजार पहुंच देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे भारत के सेवा निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
समझौते में कुशल क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा की नई व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत एक समय में 5,000 वीजा उपलब्ध होंगे और अधिकतम तीन साल तक रहने की अनुमति होगी।
न्यूजीलैंड ने पहली बार किसी देश के साथ भारत के लिए छात्रों के आवागमन और पढ़ाई के बाद काम करने के लिए अलग व्यवस्था बनाई है।
भाषा रमण अजय
अजय

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