नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) नीति आयोग ने जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण देश में दीर्घकालिक देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए बुधवार को राष्ट्रीय देखभाल नीति तैयार करने और देखभाल परिषद गठित करने तथा इस क्षेत्र के लिए समर्पित संवर्ग तैयार करने की सिफारिश की है।
देखभालकर्ता परिषद द्वारा देखभालकर्ताओं को पेशेवर मान्यता दिलाई जाती है।
आयोग ने ‘विकसित भारत 2047 में देखभाल व्यवस्था की पुनर्कल्पना : देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाने की रणनीतियां’ शीर्षक से जारी अपनी रिपोर्ट में देखभाल करने वालों के लिए सामाजिक सुरक्षा, कल्याणकारी उपायों तथा उद्यमिता सहायता का दायरा बढ़ाने की भी सिफारिश की है।
रिपोर्ट में भारत को प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और वैश्विक अवसरों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में प्रशिक्षण, सेवा उपलब्ध कराने और निगरानी के लिए प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल नवाचार का अधिक उपयोग करने की सिफारिश की गई है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘‘देखभाल केवल एक सेवा नहीं, बल्कि हमारे मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त प्रमाण है। ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत के पास देश और दुनिया, दोनों स्तरों पर देखभाल क्षेत्र में सुनियोजित निवेश के माध्यम से अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता का लाभ उठाने का महत्वपूर्ण अवसर है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, भारत तेजी से जनसांख्यिकीय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जिससे दीर्घकालिक देखभाल सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2050 तक देश में बुजुर्गों की संख्या 34.7 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे मौजूदा देखभाल व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव पड़ेगा।
भाषा यासिर योगेश
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