एनएलसी इंडिया, रिलायंस गुजरात में सामूहिक रूप से भूमिगत लिग्नाइट गैसीकरण की संभावना तलाशेंगी

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एनएलसी इंडिया, रिलायंस गुजरात में सामूहिक रूप से भूमिगत लिग्नाइट गैसीकरण की संभावना तलाशेंगी

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  • Publish Date - May 31, 2026 / 11:00 AM IST,
    Updated On - May 31, 2026 / 11:00 AM IST

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) गुजरात में भूमिगत लिग्नाइट गैसीकरण परियोजना विकसित करने की संभावनाओं का संयुक्त रूप से अध्ययन करेंगी। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक ईंधन संकट के बीच देश में गैसीकृत ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएलसीआईएल और रिलायंस के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत लिग्नाइट भंडारों को भूमिगत गैसीकरण तकनीक के जरिये उपयोगी गैस में बदलने की व्यवहार्यता और तकनीकी क्षमता का आकलन किया जाएगा।

गुजरात में एनएलसीआईएल के स्वामित्व वाले दो लिग्नाइट ब्लॉक को इस परियोजना के लिए संभावित स्थान के रूप में चुना गया है।

वर्तमान में दोनों कंपनियां इस बारे में शुरुआती तकनीकी अध्ययन कर रही हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज को गैसीकरण प्रौद्योगिकी में उसके अनुभव और विशेषज्ञता के कारण इस परियोजना से जोड़ा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो इससे औद्योगिक उपयोग के लिए सिंथेसिस गैस (सिनगैस) का एक अतिरिक्त घरेलू स्रोत विकसित हो सकता है। इससे भारत की आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

एनएलसीआईएल लंबे समय से अपने लिग्नाइट संसाधनों के बेहतर व्यावसायिक उपयोग के विकल्प तलाश रही है। भूमिगत लिग्नाइट गैसीकरण तकनीक में जमीन के भीतर मौजूद लिग्नाइट को सिंथेसिस गैस में परिवर्तित किया जाता है। यह गैस हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य गैसों का मिश्रण होती है, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में या रसायन एवं उर्वरक उद्योगों में कच्चे माल के तौर पर किया जा सकता है।

एक वरिष्ठ उद्योग विश्लेषक के अनुसार, गैसीकरण और गैस क्षेत्र की परियोजनाओं में रिलायंस का अनुभव परियोजना के विकास को गति देने और तकनीकी जोखिमों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

इस बीच, एनएलसीआईएल तमिलनाडु के नेवेली में लगभग 4,394 करोड़ रुपये की लागत से लिग्नाइट-से-मेथनॉल संयंत्र भी स्थापित कर रही है, जिसके अगले वर्ष तक पूरा होने की संभावना है। यह परियोजना कंपनी की विविधीकरण रणनीति का हिस्सा है।

लिग्नाइट से मेथनॉल उत्पादन की यह पहल केंद्र सरकार की कोयला गैसीकरण नीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य कोयले और लिग्नाइट का अधिक टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करना है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का है, जिसमें 7.5 करोड़ टन को इस योजना के तहत गैसीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का मानना है कि यह पहल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। वर्तमान में भारत अपनी एलएनजी आवश्यकता का 50 प्रतिशत से अधिक, यूरिया का लगभग 20 प्रतिशत, अमोनिया का 100 प्रतिशत और मेथनॉल का 80-90 प्रतिशत आयात करता है।

एनएलसी इंडिया लिमिटेड देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो लिग्नाइट खनन और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय है। बदलते ऊर्जा परिदृश्य को देखते हुए कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा तथा भारत और विदेशों में कोयला खनन कारोबार में भी विस्तार किया है।

भाषा अजय अजय

अजय