नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लि. (सेल) का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का उसके इस्पात उत्पादों की कीमतों पर केवल मामूली असर पड़ेगा। कंपनी ने कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों की व्यवस्था भी शुरू कर दी है।
प्रमुख इस्पात कंपनी सेल के नवनियुक्त चेयरमैन अशोक पांडा ने बताया कि कंपनी दुबई से चूना पत्थर (लाइमस्टोन) जैसे कच्चे माल की खरीद करती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है। पहले माल की लागत एवं भाड़ा (सीएफआर) लगभग 23-24 डॉलर प्रति टन होता था, लेकिन अब यह बढ़कर करीब 35 डॉलर प्रति टन हो गया है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बढ़ी हुई लागत का इस्पात की बिक्री कीमतों पर बहुत सीमित असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि तैयार इस्पात के दामों पर इसका प्रभाव मुश्किल से 100 से 200 रुपये प्रति टन के बीच रहेगा।
पांडा ने कहा कि किसी संकट के समय कीमतों से अधिक महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता होती है। उत्पादन में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए कंपनी विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के साथ समझौते कर रही है और पश्चिम एशिया से वैकल्पिक मार्गों के जरिये अधिक मात्रा में सामग्री प्राप्त करने की दिशा में काम कर रही है।
इस्पात विनिर्माण की प्रक्रिया में काम आने वाले दो प्रमुख कच्चे माल लौह अयस्क और कोकिंग कोयला होते हैं।
उन्होंने कहा कि सेल लौह अयस्क की अपनी पूरी जरूरत को स्वयं की खदानों से पूरा करती है, जबकि कोकिंग कोयले का बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया एवं रूस जैसे विदेशी बाजारों से आयात किया जाता है।
इस्पात विनिर्माण में उपयोग होने वाला चूना पत्थर एक महत्वपूर्ण ‘फ्लक्स’ है, जो पिघले हुए लोहे से सिलिका, फॉस्फोरस और सल्फर जैसी अशुद्धियों को हटाने में मदद करता है।
ईंधन आपूर्ति के संदर्भ में पांडा ने कहा, ‘चौथी तिमाही में कुछ चुनौतियां थीं, लेकिन कंपनी ने कई संयंत्रों में पाइप-वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) का उपयोग बढ़ाकर और अन्य स्थानों पर एलपीजी भंडारण सुविधाएं विकसित कर स्थिति को संभाल लिया है।’
उन्होंने विश्वास जताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ईंधन आपूर्ति कोई बड़ी चुनौती नहीं बनेगी।
भाषा अजय
प्रेम
प्रेम