बीते सप्ताह सरसों में सुधार, सोयाबीन तेल-तिलहन व पाम-पामोलीन में गिरावट

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बीते सप्ताह सरसों में सुधार, सोयाबीन तेल-तिलहन व पाम-पामोलीन में गिरावट

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  • Publish Date - May 31, 2026 / 09:08 AM IST,
    Updated On - May 31, 2026 / 09:08 AM IST

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) कम आवक के बीच अचार के मौसम की मांग बढ़ने से बीते सप्ताह तेल-तिलहन बाजारों में सरसों तेल के दाम में मामूली सुधार देखा गया। कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौलातेल के दाम में भी सुधार आया। दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने से सोयाबीन तेल-तिलहन तथा पाम-पामोलीन तेल के दाम गिरावट दर्शाते बंद हुए।

गर्मी की फसल की आवक शुरू होने की चर्चा के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मंडियों में सरसों की आवक कमजोर बनी हुई है। हाल के दिनों में दाम काफी नीचा रहने के बाद अब आयातित तेलों के मुकाबले सरसों का दाम मामूली अधिक हो चला है। आगे बरसात में अचार बनाने वाली कंपनियों की ओर से भी मांग अभी से बढ़ने लगी है। इन परिस्थितियों के बीच बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन के दाम में मामूली सुधार देखा गया।

इस बीच, सरकार ने बीते सप्ताह सीपीओ का आयात शुल्क मूल्य में 21 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन के आयात शुल्क मूल्य में 48 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। जबकि सोयाबीन डीगम तेल का आयात शुल्क मूल्य 19 रुपये प्रति क्विंटल घटाया है।

सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने से सोयाबीन तेल-तिलहन तथा पाम एवं पामोलीन तेल में गिरावट दर्ज हुई। मध्य प्रदेश में सोयाबीन प्लांट वालों ने सोयाबीन की खरीद के दाम को घटाया पर महाराष्ट्र के प्लांट वालों ने दाम नहीं घटाये। महाराष्ट्र, तेलंगाना में 29-30 मई को सहकारी संस्था नेफेड ने सोयाबीन की सीमित मात्रा में बिक्री के लिए कम बोली वाली निविदा को निरस्त कर दिया। यह काफी सूझ-बूझ वाला कदम है। अगले चार-पांच महीनों मे सरकार को सोयाबीन की बिक्री रोक-रोक कर करना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि मूंगफली की गर्मी की फसल की आवक की आहट के दबाव में बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम अपरिवर्तित रहे। आयातित सूरजमुखी तेल के मुकाबले मूंगफली तेल सस्ता है। मूंगफली का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कमजोर बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने से बीते सप्ताह पाम-पामोलीन तेल के दाम भी गिरावट दर्शाते बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि कपास नरमा की आवक घटने की वजह से कम उपलब्धता की स्थिति और मांग बढ़ने के कारण बिनौला तेल के दाम में सुधार दर्ज हुआ। संभवत: इसी वजह से सरकार ने देश की कपड़ा मिलों के लिए कपास नरमा पर 10 प्रतिशत के आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को इस बात की समीक्षा करने के बारे में विचार करना चाहिये कि पहले आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तिलहन खेती का इतना अधिक रकबा हुआ करता था, वहां के किसान किन परिस्थितियों में तिलहन खेती छोड़कर धान उगाने की ओर मुड़ गये। यह समीक्षा और इसके सही कारणों को समझकर उसे दूर करने से देश में तिलहन खेती को बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 150 रुपये के सुधार के साथ 7,775-7,800 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 50 रुपये के सुधार के साथ 15,700 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 25-25 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,600-2,700 रुपये और 2,600-2,745 रुपये टिन (15 किलो) पर मजबूत बंद हुए।

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 200-200 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 7,425-7,475 रुपये और 7,075-7,150 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 100 रुपये की गिरावट के साथ 15,800 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 100 रुपये की गिरावट के साथ 15,750 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 140 रुपये की गिरावट के साथ 12,170 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

गर्मी की फसल की आहट के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम 6,725-7,200 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 16,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,545-2,845 रुपये प्रति टिन पर स्थिर रुख के साथ बंद हुए।

समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 25 रुपये की गिरावट के साथ 13,950 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 125 रुपये की गिरावट के साथ 15,750 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 125 रुपये की गिरावट के साथ 14,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौला तेल का दाम भी 75 रुपये के सुधार के साथ 15,925 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

भाषा राजेश

अजय

अजय