ईपीएफ वेतन सीमा बढ़ाने की याचिका पर आगे विचार की जरूरत नहीं: न्यायालय

ईपीएफ वेतन सीमा बढ़ाने की याचिका पर आगे विचार की जरूरत नहीं: न्यायालय

ईपीएफ वेतन सीमा बढ़ाने की याचिका पर आगे विचार की जरूरत नहीं: न्यायालय
Modified Date: September 18, 2026 / 04:29 pm IST
Published Date: September 18, 2026 4:29 pm IST

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना के तहत वेतन सीमा बढ़ाने से संबंधित याचिका पर आगे विचार की जरूरत नहीं रह गई है।

मंत्रिमंडल ने अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करने को मंजूरी दी है।

न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 2014 से अपरिवर्तित 15,000 रुपये की मौजूदा वेतन सीमा को तत्काल संशोधित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा, ‘‘हमने समाचार पत्रों में देखा। आपकी सभी प्रार्थनाएं स्वीकार कर ली गई हैं।’’

सरकार ने 16 सितंबर को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अनिवार्य दायरे में आने के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करने को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य अधिक लोगों को भविष्य निधि बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस संबंध में अभी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इस पर पीठ ने कहा, ‘‘हम इस दलील का संज्ञान लेते हैं और हमारा मानना है कि रिट याचिका पर आगे विचार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि मंत्रिमंडल के फैसले के बाद संबंधित पक्ष जरूरी कदम उठाएंगे।’’

पीठ ने कहा, ‘‘समाचार पत्रों में कहा गया है कि मंत्रिमंडल ने इस पर फैसला लिया है। वे इस पर अधिसूचना जारी करेंगे।’’

याचिका में केंद्र और ईपीएफओ को कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत वेतन सीमा में भविष्य में संशोधन के लिए गतिशील फार्मूला या वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था।

इसमें न्यूनतम वेतन, मुद्रास्फीति, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, आयकर छूट की सीमा और प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय जैसे आर्थिक संकेतकों के अनुरूप वेतन सीमा में हर साल नियमित संशोधन के लिए अनिवार्य व्यवस्था अधिसूचित करने की भी मांग की गई थी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 16 सितंबर को कहा था कि मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के दायरे में आएंगे। उन्होंने कहा था कि भविष्य निधि कटौती के लिए वेतन की नई सीमा 25,000 रुपये प्रतिमाह होगी।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा था कि संशोधित सीमा 17 सितंबर से प्रभावी होगी।

ईपीएफओ की वेतन सीमा इसके पहले सितंबर, 2014 में बढ़ाकर 15,000 रुपये की गई थी।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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