घरेलू वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री चालू वित्त वर्ष में चार से छह प्रतिशत बढ़ने का अनुमान : इक्रा

घरेलू वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री चालू वित्त वर्ष में चार से छह प्रतिशत बढ़ने का अनुमान : इक्रा

घरेलू वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री चालू वित्त वर्ष में चार से छह प्रतिशत बढ़ने का अनुमान : इक्रा
Modified Date: September 18, 2026 / 04:24 pm IST
Published Date: September 18, 2026 4:24 pm IST

मुंबई, 18 सितंबर (भाषा) घरेलू वाणिज्यिक वाहन उद्योग की थोक बिक्री में चालू वित्त वर्ष में सालाना आधार पर चार से छह प्रतिशत की मामूली वृद्धि होने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने शुक्रवार को यह बात कही।

इक्रा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में उच्च तुलनात्मक आधार के कारण वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर गिरावट आने की संभावना है।

यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब इस साल अगस्त में वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 30.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खुदरा बिक्री 20.1 प्रतिशत बढ़ी।

इक्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों (एमएंडएचसीवी) की बिक्री में एक से तीन प्रतिशत और हल्के वाणिज्यिक वाहनों (एलसीवी) में छह से आठ प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। बसों की बिक्री में तीन से पांच प्रतिशत सालाना वृद्धि होने की संभावना है।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) में वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 23.4 प्रतिशत बढ़ी।

घरेलू वाणिज्यिक वाहन बिक्री में वृद्धि को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन, खनन गतिविधियों, ई-कॉमर्स से जुड़ी माल ढुलाई और वित्तपोषण की उपलब्धता से समर्थन मिला।

इक्रा ने कहा कि विशेष रूप से हल्के वाणिज्यिक वाहनों के खंड में मजबूत वृद्धि अंतिम छोर तक परिवहन गतिविधियों में मजबूती को दर्शाती है।

इक्रा के अनुसार, अगस्त 2026 में हल्के वाणिज्यिक वाहनों की खुदरा बिक्री सालाना आधार पर 21.3 प्रतिशत बढ़ी, हालांकि पिछले महीने की तुलना में इसमें 9.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से भी हल्के वाणिज्यिक वाहन खंड की मांग को बल मिला। इसके अलावा, अंतिम छोर तक माल ढुलाई में सुधार और ई-कॉमर्स से जुड़ी गतिविधियों में मजबूती से भी मांग को सहारा मिला।

हालांकि, जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी वाहनों के स्वामित्व की ऊंची लागत इस खंड के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी हुई है।

भाषा योगेश रमण

रमण


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