नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत अब कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए अलग नियामकीय ढांचा बनाने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है और अब अलग एआई विनियमन पर विचार करने का समय आ गया है।
कृष्णन ने कहा कि अब तक मौजूदा कानूनी प्रावधान डीपफेक और एआई-जनित सिंथेटिक सामग्री जैसे शुरुआती मुद्दों से निपटने के लिए पर्याप्त रहे हैं लेकिन आगे ‘अतिरिक्त विनियमन या कानून की जरूरत पड़ सकती है।’
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसी चर्चा है जो शुरू हो चुकी है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और मैं पहले भी कह चुके हैं कि सही समय आने पर हम एआई विनियमन पर विचार करेंगे। लगता है कि वह समय आ रहा है और हम इस पर काम शुरू करेंगे।’’
कृष्णन ने कहा कि सरकार ने अब तक आईटी नियमों और अन्य मौजूदा कानूनों का इस्तेमाल एआई से जुड़ी चिंताओं के समाधान के लिए किया है, लेकिन अब संभवतः अलग कानून बनाने का समय आ गया है।
हालांकि, नए एआई कानून की समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मंत्रालय स्तर पर कानून का मसौदा तैयार किया जा सकता है, लेकिन इसे लागू करने का समय विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
पिछले महीने वैष्णव ने एक साक्षात्कार में कहा था कि मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी कानून उस समय बनाया गया था जब एआई का तेजी से विस्तार नहीं हुआ था, लिहाजा बदलते परिदृश्य से निपटने के लिए नए कानूनी ढांचे की जरूरत पड़ सकती है।
वैश्विक स्तर पर भी नीति-निर्माता जेनरेटिव एआई से उत्पन्न चुनौतियों… जैसे डीपफेक, गलत सूचना और ऑनलाइन नुकसान से जूझ रहे हैं। भारत ने भी एआई आधारित डीपफेक पर सख्ती के लिए आईटी नियमों को कड़ा किया है।
इस साल फरवरी में सरकार ने ऑनलाइन मंचों के लिए एआई-जनित और कृत्रिम सामग्री से निपटने को लेकर कड़े प्रावधान लागू किए थे। इसके तहत ‘एक्स’ और ‘इंस्टाग्राम’ जैसे मंचों को सक्षम प्राधिकरण या अदालत द्वारा चिह्नित ऐसी सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन कर एआई-जनित और कृत्रिम सामग्री को औपचारिक रूप से परिभाषित भी किया है।
इसके अलावा, केंद्र सरकार एआई-जनित सामग्री के लिए कड़े खुलासा मानकों पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत ऐसी सामग्री पर स्पष्ट और लगातार दिखाई देने वाले चिह्न अनिवार्य किए जा सकते हैं, ताकि लोगों को पूरी अवधि के दौरान यह जानकारी रहे कि सामग्री सिंथेटिक है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय