नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा उत्पादित गैस की एपीएम कीमत बढ़ाकर सात डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) कर दी है जो पहले 6.75 डॉलर प्रति इकाई थी। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई।
कीमतों में यह संशोधन पुराने और विरासत वाले गैस क्षेत्रों से उत्पादित गैस पर लागू होगा, जो विनियमित मूल्य व्यवस्था (एपीएम) के तहत आती है। कीमत में इस वृद्धि का असर उर्वरक, सीएनजी और पाइप से होने वाली रसोई गैस आपूर्ति जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
देश के कुल घरेलू गैस उत्पादन में एपीएम गैस की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है और इसका उत्पादन लगभग 9.2 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन है।
सरकार ने 2023 में स्वीकृत मूल्य निर्धारण व्यवस्था के तहत कीमतों में यह संशोधन किया है। इस व्यवस्था में पुराने क्षेत्रों से उत्पादित गैस की कीमत भारतीय कच्चा तेल बास्केट के मासिक औसत का 10 प्रतिशत तय की जाती है और इसे हर महीने अधिसूचित किया जाता है।
हालांकि, ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के पुराने ब्लॉकों से उत्पादित गैस की कीमत चार से 6.5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के दायरे में तय थी। यह सीमा दो साल तक स्थिर रखी गई थी और उसके बाद हर साल कीमत 0.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू बढ़ाने का प्रावधान किया गया।
अधिकतम कीमत को 2025-26 से बढ़ाकर 6.75 डॉलर किया गया था और अब इसे बढ़ाकर सात डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दिया गया है।
पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के आदेश के मुताबिक, अप्रैल के लिए घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत सकल ऊष्मीय मान (जीसीवी) के आधार पर 10.76 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तय हुई है, लेकिन एपीएम गैस के लिए यह निर्धारित ऊपरी सीमा के अधीन रहेगी।
प्राकृतिक गैस का उपयोग उर्वरक उत्पादन, बिजली उत्पादन, वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में पाइप से रसोई गैस पहुंचाने में किया जाता है। ऐसे में कीमतों में इस वृद्धि का व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव है और कच्चे तेल की कीमतें एक महीने में लगभग 50 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
सरकार ने अप्रैल, 2023 में एक अधिसूचना के जरिये ओएनजीसी और ओआईएल को नए कुओं से उत्पादित गैस पर एपीएम कीमत के ऊपर 20 प्रतिशत तक प्रीमियम लेने की भी अनुमति दी थी।
वहीं, गहरे समुद्र और उच्च दबाव-उच्च तापमान वाले मुश्किल क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिए कंपनियों को मूल्य निर्धारण और विपणन की स्वतंत्रता दी गई है।
इस ढांचे के तहत ऐसी गैस के लिए कीमत की ऊपरी सीमा अलग से तय की जाती है, जिसे वर्ष में दो बार अधिसूचित किया जाता है। हालांकि, अप्रैल-सितंबर, 2026 की अवधि के लिए नई सीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
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