ओएनजीसी ने पश्चिमी अपतटीय तेल गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने को बीपी के साथ की साझेदारी

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ओएनजीसी ने पश्चिमी अपतटीय तेल गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने को बीपी के साथ की साझेदारी

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 05:40 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 05:40 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने अपने पश्चिमी अपतटीय तेल और गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने के लिए ब्रिटेन की बीपी को तकनीकी सेवा प्रदाता के रूप में नियुक्त किया है।

यह साझेदारी भारत की पुराने हो चुके तेल एवं गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।

ओएनजीसी ने बयान में कहा कि बीपी एक्सप्लोरेशन सर्विसेज इंडिया लि. को मुंबई अपतटीय बेसिन के पश्चिमी अपतटीय क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया है। इसमें प्रमुख मुंबई हाई क्षेत्र शामिल नहीं है।

ओएनजीसी ने पिछले वर्ष जनवरी में भारत के सबसे बड़े उत्पादक तेल क्षेत्र मुंबई हाई के लिए बीपी को नियुक्त किया था। यह कंपनी के पश्चिमी अपतटीय तेल और तेल समतुल्य गैस उत्पादन का लगभग 38 प्रतिशत है।

कंपनी ने कहा कि मुंबई हाई के लिए साझेदारी से शुरुआती परिणाम में कुछ लाभ दिखे हैं। इसमें उत्पादन में गिरावट में कमी और बेहतर कुआं, जलाशय तथा सुविधा प्रबंधन के साथ ही बुनियादी ढांचे में बाधाओं को दूर करने और बेहतर निगरानी के माध्यम से उत्पादन स्थिर बनाये रखने में सुधार शामिल हैं।

अब नई साझेदारी के तहत, बीपी की भारतीय इकाई वैश्विक प्रौद्योगिकियों और प्रबंधन पद्धतियों का उपयोग करके पुराने पड़ चुके अपतटीय क्षेत्रों में जलाशय प्रदर्शन का आकलन करेगी और परिचालन सुधारों को चिन्हित करेगी।

ओएनजीसी ने कहा कि इस समझौते से 10 साल की अनुबंध अवधि में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 10.8 प्रतिशत बढ़ सकता है। इससे उत्पादन 4.62 करोड़ टन के आधार स्तर से बढ़कर 5.13 करोड़ टन हो जाएगा। वहीं प्राकृतिक गैस का उत्पादन 31.5 प्रतिशत बढ़कर 82.68 अरब घन मीटर से 108.69 अरब घन मीटर होने का अनुमान है।

कंपनी ने कहा कि पश्चिमी अपतटीय क्षेत्रों से संयुक्त तेल और तेल समतुल्य गैस उत्पादन अनुबंध अवधि के दौरान लगभग 24 प्रतिशत बढ़कर लगभग 16 करोड़ टन तेल-समतुल्य होने की उम्मीद है।

उत्पादन में वृद्धि वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होने की उम्मीद है। इसका पूर्ण प्रभाव वित्त वर्ष 2029-30 से दिखाई देगा।

समझौते के तहत, तकनीकी सेवा प्रदाता को पहले दो वर्षों के लिए एक निश्चित शुल्क प्राप्त होगा और बाद में लागत वसूली के पश्चात हाइड्रोकार्बन उत्पादन में वृद्धि से उत्पन्न राजस्व का एक हिस्सा मिलेगा।

भाषा रमण अजय

अजय