नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज तेज करने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। कंपनी अब गहरे पानी में ड्रिलशिप खरीदने या किसी वैश्विक कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम बनाने की संभावनाएं तलाश रही है, ताकि उसे विशेष खुदाई क्षमता पर स्थायी और प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिल सके। ड्रिलशिप से आशय समुद्र में गहरे पानी में तेल-गैस के कुओं की खुदाई करने वाले विशेष जहाज से है।
ओएनजीसी अपने ‘मिशन समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत यह कदम उठाने जा रही है।
ओएनजीसी ने इसके लिए एक वैश्विक विशेषज्ञता वाले समुद्री रिग-ब्रोकर सलाहकार नियुक्त करने को लेकर रुचि पत्र (ईओआई) भी जारी किया है। प्रस्तावित सलाहकार दुनिया भर में संभावित ड्रिलशिप मालिकों और साझेदारों की पहचान करेगा। साथ ही, वह उपलब्ध परिसंपत्तियों का तकनीकी और व्यावसायिक आकलन, मूल्यांकन तथा संभावित सौदे की बातचीत में ओएनजीसी की मदद करेगा।
ओएनजीसी के अनुसार, यह पहल ‘मिशन समुद्र मंथन’ के तहत समर्पित और प्राथमिकता वाली गहरे पानी की ड्रिलशिप क्षमता तैयार करने की दिशा में है। कंपनी ड्रिलशिप के स्वामित्व अथवा संयुक्त उद्यम के जरिये अपनी खुदाई जरूरतों को सुरक्षित करना चाहती है।
केंद्र सरकार ने हाल में ‘समुद्र मंथन-राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना पर वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य देश के अपतटीय क्षेत्रों, विशेष रूप से गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज को गति देना और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है।
योजना के तहत सरकार गहरे पानी में खोजी कुओं की लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग देगी। हालांकि, यह सहायता प्रति कुआं अधिकतम 675 करोड़ रुपये तक सीमित होगी। कार्यक्रम में 60 गहरे पानी के खोजी कुओं की खुदाई, बड़े पैमाने पर भूकंपीय सर्वेक्षण, साझा अपतटीय उत्पादन एवं निकासी बुनियादी ढांचे का विकास और तेल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र की स्थापना शामिल है।
गहरे पानी में खुदाई के लिए विशेष प्रकार के ड्रिलशिप की जरूरत होती है। भारत में फिलहाल इस तरह के अत्याधुनिक ड्रिलशिप के निर्माण की क्षमता नहीं है। ऐसे में ओएनजीसी सहित भारतीय अन्वेषण कंपनियां विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाले रिग को आमतौर पर किराये पर हासिल करती हैं।
प्रस्तावित सलाहकार संभावित वैश्विक ड्रिलशिप मालिकों और ठेकेदारों की पहचान के साथ-साथ तकनीकी जांच, व्यावसायिक तुलना और सौदे की शर्तों पर बातचीत में सहायता करेगा।
पूरी प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में करीब तीन महीने तक संभावित साझेदारों की पहचान, जांच और चयन किया जाएगा तथा ओएनजीसी के लिए शुरुआती व्यावसायिक आधार तैयार किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में अधिकतम छह महीने तक स्वामित्व या संयुक्त उद्यम को लेकर बातचीत, दस्तावेज तैयार करने, वित्तपोषण में समन्वय और सौदे को अंतिम रूप देने का काम होगा। इसमें ड्रिलशिप को भारत लाने की प्रक्रिया में सहायता भी शामिल होगी।
इस कदम से ओएनजीसी को वैश्विक रिग बाजार पर निर्भरता कम करने और देश में बड़े पैमाने पर गहरे पानी में तेल एवं गैस खोज कार्यक्रम को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ओएनजीसी ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जबकि वह अपनी गहरे पानी की
खुदाई क्षमता को बढ़ाना चाहती है और तीसरे पक्ष की रिग उपलब्धता पर निर्भरता कम करना चाहती है। हालांकि, रुचि पत्र में ड्रिलशिप की संख्या, प्रकार या लागत का उल्लेख नहीं है।
भाषा अजय अजय
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