सीताफल के बीज से बना जैविक नैनो कीटनाशक, भंडारित अनाज को कीटों से बचाने में कारगर
सीताफल के बीज से बना जैविक नैनो कीटनाशक, भंडारित अनाज को कीटों से बचाने में कारगर
जयपुर, 19 जुलाई (भाषा) स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के एक अतिथि संकाय सदस्य ने सीताफल के बीज के तेल से एक जैविक नैनो कीटनाशक विकसित किया है, जो भंडारित अनाज को कीटों से सुरक्षित रखने के लिए एक टिकाऊ समाधान साबित हो सकता है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
नैनो प्रौद्योगिकी का उपयोग कर डॉ. मनोज मीणा द्वारा विकसित इस नवाचार को दो पेटेंट मिल चुके हैं और इसे कृषि में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले रासायनिक कीटनाशकों के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
मीणा ने बताया कि यह शोध उनके पीएचडी कार्य का हिस्सा था, जिसे उन्होंने डॉ. दीपक राजपुरोहित के मार्गदर्शन में पूरा किया। इसके तहत सीताफल के बीज के तेल से एक नैनो-इमल्शन विकसित किया गया।
उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह प्राकृतिक उत्पाद है और इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक घटकों का उपयोग नहीं किया गया है।”
उन्होंने बताया कि यह कीटनाशक लंबे समय तक भंडारित गेहूं, चना, बाजरा और मूंग जैसे अनाजों को घुन और लार्वा जैसे कीटों से सुरक्षित रखने में प्रभावी साबित हुआ है। ये कीट अक्सर लंबे समय तक भंडारण के दौरान अनाज की गुणवत्ता और मात्रा, दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
मीणा ने कहा, “जब किसान लंबे समय तक अनाज का भंडारण करते हैं, तो उसमें अक्सर कीट लग जाते हैं। यह जैविक नैनो कीटनाशक अनाज की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हो सकता है।”
उन्होंने कृषि में कृत्रिम रसायनों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा, “वर्तमान समय में ‘सिंथेटिक’ रसायनों का अत्यधिक उपयोग मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। ऐसे में पौधों पर आधारित जैविक तकनीक किसानों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकती है।”
मीणा ने बताया कि इस उत्पाद के व्यावसायीकरण और इसे किफायती बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मैं उत्पादन बढ़ाने और इसकी लागत कम करने के लिए कंपनियों के साथ सहयोग करने का प्रयास कर रहा हूं, ताकि यह किसानों को आसानी से उपलब्ध हो सके।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस शोध के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का अवसर मिला, जो उनके लिए गर्व की बात है।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत योगेश
योगेश

Facebook


