वैश्विक चुनौतियों के बीच एल्युमीनियम उद्योग ने सरकार से समर्थन की मांग की
वैश्विक चुनौतियों के बीच एल्युमीनियम उद्योग ने सरकार से समर्थन की मांग की
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्कों के कारण सिकुड़ते निर्यात बाजार और खाड़ी तथा आसियान देशों से घटिया कबाड़ (स्क्रैप) के बढ़ते आयात पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्रालय से सुरक्षात्मक नीतिगत समर्थन मांगा है।
उद्योग निकाय ने इसके लिए मेक्सिको में बढ़ते संरक्षणवाद, इंडोनेशिया में क्षमता विस्तार और रूस द्वारा की जा रही डंपिंग का भी हवाला दिया है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को सौंपे एक प्रतिवेदन में एसोसिएशन ने कहा कि चूंकि वैश्विक स्तर पर केवल उच्च गुणवत्ता वाले स्क्रैप के आयात को ही बढ़ावा दिया जा रहा है, इसलिए भारत के लिए भी जल्द से जल्द ऐसे ही सख्त गुणवत्ता मानक तय करना समय की मांग है।
एसोसिएशन के मुताबिक, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं निवेश आकर्षित करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ऊंचे आयात शुल्क जैसे व्यापारिक उपायों से अपने घरेलू एल्युमीनियम उद्योगों को संरक्षण दे रही हैं।
उद्योग निकाय ने पुरजोर वकालत की है कि घरेलू उद्योग के हितों को देखते हुए भारत को भी अपने सुरक्षा उपायों को तत्काल मजबूत करना चाहिए।
एसोसिएशन ने सरकार से एल्युमीनियम उत्पादों पर मौजूदा शुल्क व्यवस्था जारी रखने और निम्न गुणवत्ता वाले स्क्रैप के बढ़ते आयात पर रोक लगाने के लिए मूल सीमा शुल्क में वृद्धि सहित अन्य व्यापार उपायों पर विचार करने का आग्रह किया है। उसने मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आयात शुल्क 15 से 50 प्रतिशत तक है।
एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि ‘एल्युमीनियम एंड एल्युमीनियम अलॉय स्क्रैप – रिक्वायरमेंट्स एंड कंडीशंस ऑफ डिलिवरी’ शीर्षक वाले भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानक को बिना किसी बदलाव के अधिसूचित किया जाए।
उसने कहा कि इसे नीति आयोग और बीआईएस जैसे निकायों द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।
उसने कहा कि इससे भारत को अनियंत्रित गुणवत्ता वाले और संभावित रूप से हानिकारक वैश्विक एल्युमीनियम स्क्रैप का डंपिंग स्थल बनने से रोका जा सकेगा।
एसोसिएशन के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद एल्युमीनियम स्क्रैप को उसकी गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा, जिसमें एल्युमीनियम की मात्रा 95 प्रतिशत से अधिक से लेकर 60 प्रतिशत से कम तक होगी।
भाषा योगेश अजय
अजय

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