रावघाट खदान सड़क निर्माण में 540 से अधिक पेड़ कटने का आरोप, कंपनी का उल्लंघन से इनकार

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रावघाट खदान सड़क निर्माण में 540 से अधिक पेड़ कटने का आरोप, कंपनी का उल्लंघन से इनकार

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  • Publish Date - June 28, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - June 28, 2026 / 04:41 PM IST

कांकेर, 28 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रावघाट खदान से लौह अयस्क के परिवहन के लिए वन विभाग की पूर्व अनुमति के बिना एक कच्ची सड़क बनाने के उद्देश्य से 500 से अधिक पेड़ काट दिए गए। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, खदान का आवंटन पाने वाली कंपनी ने इस आरोप से इनकार किया है।

रावघाट खदान का आवंटन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (सेल) की इकाई ‘भिलाई इस्पात संयंत्र’ (बीएसपी) को किया गया है। संयंत्र ने पेड़ काटे जाने की पुष्टि की है, लेकिन किसी भी प्रकार के उल्लंघन से इनकार करते हुए कहा कि सड़क का निर्माण उसी क्षेत्र में किया गया है जिसके लिए पहले ही वैधानिक वन मंजूरी मिल चुकी थी।

बीएसपी अधिकारियों के अनुसार, सड़क का निर्माण मार्च-अप्रैल में किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि पेड़ काटने का कथित अवैध मामला सामने आने के बाद तीन वन रक्षकों और दो क्षेत्रीय सहायकों को उस क्षेत्र से हटा दिया गया है।

पूर्वी भानुप्रतापपुर के उप वन संरक्षक (क्षेत्रीय) ऋषभ जैन ने बताया कि वन विभाग के कर्मियों ने 18 जून को सरगीपाली गांव के पास इस स्थल का निरीक्षण किया और वहां सड़क बनी हुई पाई, जिसके बाद एक प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (पीओआर) दर्ज की गई।

वन विभाग के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रावघाट लौह अयस्क खदान परियोजना के लिए पहले करीब 880 हेक्टेयर वन भूमि को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, यह नई सड़क उस मंजूरशुदा इलाके से बाहर, आरक्षित वन के अंदर बनाई गई है।

अधिकारी के अनुसार, खदान से रेलवे माल ढुलाई केंद्र तक ट्रकों के जरिये लौह अयस्क भेजने के लिए लगभग 1.34 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी यह कच्ची सड़क बनाई गई थी।

अधिकारी के अनुसार, पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि इस सड़क के निर्माण के लिए कोई कानूनी मंजूरी नहीं ली गई थी। शुरुआती जांच के मुताबिक, सड़क बनाने के लिए करीब 540 पेड़ काटे गए हैं, और पूरी जांच के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सड़क का रास्ता बनाने के लिए पहाड़ी के कुछ हिस्सों को भी काटा गया है।

भाषा योगेश अजय

अजय