(EPF Pension Calculation/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: EPF Pension Calculation: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को अक्सर रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सरकारी नौकरियों की तरह यहां गारंटीड पेंशन की सुविधा नहीं होती। लेकिन अगर कोई कर्मचारी EPFO का सदस्य है और उसकी सैलरी से हर महीने पीएफ कटता है तो उसे रिटायरमेंट के बाद कुछ हद तक पेंशन का लाभ मिल सकता है। खासकर 2026 में रिटायर होनने वाले कर्मचारियों के लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी मासिक पेंशन मिलेगी।
EPFO के तहत कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने PF की कटौती होती है। इसमें दो हिस्से EPF और EPS होते हैं। EPF हिस्सा कर्मचारी की बचत में जाता है जबकि कंपनी का एक हिस्सा पेंशन स्कीम यानी EPS में जमा होता है। यही EPS राशि आगे चलकर रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन के रूप में मिलती है। यह व्यवस्था लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक तरह की आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है।
EPS का लाभ पाने के लिए कुछ नियम पूरे करना जरूरी है। सबसे पहले कर्मचारी को कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करनी होती है। इसके बाद पूरी पेंशन पाने के लिए 58 वर्ष की आयु तक पहुंचना जरूरी है। अगर कोई कर्मचारी समय से पहले पेंशन लेना शुरू करता है तो उसकी पेंशन राशि में कटौती हो सकती है। इसलिए सही उम्र तक इंतजार करना फायदेमंद माना जाता है।
EPFO ने पेंशन की गणना के लिए एक सरल फॉर्मूला है- (पेंशन योग्य सैलरी × सेवा के वर्ष) ÷ 70। हालांकि नियम के अनुसार अधिकतम पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रुपये प्रति माह मानी जाती है। यानी भले ही किसी की असल सैलरी ज्यादा हो लेकिन पेंशन इसी सीमा के आधार पर तय होती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की सेवा 50 साल है तो उसकी मासिक पेंशन लगभग 10,714 रुपये बन सकती है।
अगर कोई कर्मचारी 58 साल की उम्र से पहले पेंशन लेना शुरू करता है तो उसे हर साल लगभग 4% की कटौती का सामना करना पड़ सकता है। इसका मतलब है कि जल्दी पेंशन लेने पर मासिक राशि कम हो जाएगी। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कर्मचारी सही उम्र तक काम करें ताकि उन्हें पूरी पेंशन का लाभ मिल सके।