संसदीय समिति ने दीपम से पीएसयू के अप्रत्यक्ष नियंत्रण मॉडल की रणनीति बनाने को कहा
संसदीय समिति ने दीपम से पीएसयू के अप्रत्यक्ष नियंत्रण मॉडल की रणनीति बनाने को कहा
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने मंगलवार को ‘निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग’ (दीपम) से कहा कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम होने पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए ‘गोल्डन शेयर’ या अप्रत्यक्ष नियंत्रण मॉडल अपनाने पर स्पष्ट कानूनी रणनीति तैयार करे।
फिलहाल किसी कंपनी को सार्वजनिक क्षेत्र का दर्जा बनाए रखने के लिए सरकार की हिस्सेदारी न्यूनतम 51 प्रतिशत होना जरूरी है। सरकार अपनी हिस्सेदारी को इस सीमा से नीचे लाने के साथ नियंत्रण बनाए रखने के विकल्पों पर विचार कर रही है जिसमें ‘गोल्डन शेयर’ की संकल्पना भी शामिल है।
भाजपा नेता भर्तृहरि महताब की अगुवाई वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) ढांचे को उच्च प्रदर्शन वाले माध्यम के रूप में विकसित किया जाए। इसमें ‘उत्तराधिकार नियोजन’ अनिवार्य हो और लाभांश के दबाव के कारण केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) की आंतरिक संसाधन क्षमता प्रभावित न हो।
संसदीय समिति ने कहा कि सीपीएसई के लिए सालाना तीन लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय लक्ष्य को बनाए रखना दीर्घकालिक लाभकारी वृद्धि के लिए जरूरी है।
इसके साथ ही दीपम विभाग को अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) के क्रियान्वयन के लिए एक संतुलित रूपरेखा तैयार करने को कहा गया है, जिसमें मजबूत मूल्यांकन मानक और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था शामिल हो।
समिति ने आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) को भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर उधारी कैलेंडर के अनुकूलन और कर्ज घटाने के नए उपाय तलाशने की भी सिफारिश की। साथ ही, लंबी अवधि के कर्ज ‘प्रोफाइल’ की ओर बढ़ने से पुनर्वित्त जोखिम कम होगा और पूंजी निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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