संसदीय समिति ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक के लिए कई सुझाव दिए

संसदीय समिति ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक के लिए कई सुझाव दिए

संसदीय समिति ने कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक के लिए कई सुझाव दिए
Modified Date: August 3, 2026 / 07:27 pm IST
Published Date: August 3, 2026 7:27 pm IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) कॉरपोरेट कानूनों में संशोधन से जुड़े विधेयक की समीक्षा करने वाली संसदीय समिति ने सोमवार को कुछ गैर-अनुपालन मामलों में 50,000 रुपये का निश्चित जुर्माना तय करने और छोटे उद्यमों के लिए वस्तुओं या सेवाओं के रूप में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) योगदान की अनुमति देने सहित कई सिफारिशें कीं।

भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति ने 1,100 से अधिक पृष्ठ की अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश की। समिति ने सुझाव दिया है कि अनिवार्य वैधानिक ऑडिट से छूट केवल छोटे उद्यमों को दी जाए, सार्वजनिक कंपनियों को नहीं।

वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को 23 मार्च को लोकसभा में पेश किया था। कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक को समीक्षा के लिए समिति को भेजा गया था।

इस विधेयक में कंपनी अधिनियम और सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी) अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित हैं।

समिति ने सिफारिश की है कि कुछ अनुपालन प्रावधानों के उल्लंघन पर अधिकतम एक लाख रुपये तक के जुर्माने के स्थान पर 50,000 रुपये का निश्चित दंड लगाया जाए, जिससे अपराध श्रेणी से बाहर रखने और तर्कसंगत बनाने के प्रयासों को बल मिले।

‘कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व’ के संदर्भ में समिति ने 10 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ की सीमा बरकरार रखने, छोटे उद्यमों को वस्तुओं या सेवाओं के रूप में योगदान की अनुमति देने और अयोग्य एजेंसियों की सूची बनाए रखने का सुझाव दिया है।

रिपोर्ट में विदेशी कंपनियों को बिना मूल देश में परिसमापन के भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में स्थानांतरित होने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है, ताकि उनका भारत में संचालन आसान हो सके।

समिति ने प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक की नियुक्ति की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष और अधिकतम आयु 70 से बढ़ाकर 75 वर्ष करने का सुझाव दिया है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) के आदेशों के अनुपालन में विफलता पर कारावास का प्रावधान हटाने, दंड वसूली के लिए नया ढांचा लागू करने और दिवाला मामलों के लिए विशेष पीठों के गठन को अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की गई है।

समिति ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में लंबित मामलों के निपटारे के लिए अतिरिक्त पीठों के गठन और प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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