नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) संसदीय समिति ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए पारंपरिक फसलों के अलावा सभी जैविक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय नहीं करने पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय की शुक्रवार को खिंचाई की।
कृषि, पशुपालन एवं खाद्य प्रसंस्करण पर संसदीय स्थायी समिति द्वारा मंत्रालय को जवाब देने और कार्रवाई करने के लिए यह सिफारिश अपनी 17वीं रिपोर्ट में की गई।
राज्यसभा में कार्रवाई रिपोर्ट रखते हुए मंत्रालय ने बताया कि एमएसपी 22 वस्तुओं के लिए तय किया गया है और अखिल भारतीय स्तर पर गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य कृषि लागत तथा मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश पर आधारित है।
मंत्रालय के जवाब को खारिज करते हुए समिति ने कहा, ‘‘ जैविक खेती के लिए खाद बनाने, निराई-गुड़ाई करने और खेत में आदान वस्तुओं को तैयार करने के लिए अतिरिक्त श्रम की आवश्यकता होती है। साथ ही प्रमाणीकरण एवं पृथक्करण पर व्यय की आवश्यकता होती है जो पारंपरिक एमएसपी गणना में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया जाता है।’’
इसमें कहा गया कि एमएसपी तय करने से किसानों को मूल्य जोखिम से बचाया जा सकेगा, उन्हें उच्च लागत और कम प्रारंभिक पैदावार के लिए मुआवजा दिया जा सकेगा तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को एक व्यवहारिक, मापनयोग्य उत्पादन प्रणाली के रूप में मुख्यधारा में लाया जा सकेगा।
जैविक फसलों के लिए एमएसपी एक स्पष्ट, अग्रिम संकेत भेजेगा कि राज्य बदलाव के वर्षों के दौरान किसानों का समर्थन करेगा, अधिक उत्पादकों को जैविक प्रबंधन के तहत क्षेत्र बदलने के लिए प्रोत्साहित करेगा और प्राकृतिक खेती और परंपरागत कृषि विकास योजना जैसे कार्यक्रमों को जमीन पर और अधिक प्रभावी बनाएगा।
समिति ने कहा, ‘‘ जैविक उत्पादों के लिए एमएसपी जैविक किसानों को मूल्य जोखिम से बचाने, उन्हें उच्च लागत और कम प्रारंभिक पैदावार के लिए मुआवजा देने तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को एक व्यवहारिक, मापनयोग्य उत्पादन प्रणाली के रूप में मुख्यधारा में लाने के लिए आवश्यक है।’’
भाषा राजेश राजेश निहारिका
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