Petrol Diesel Price Today 20 April 2026: 32 रुपए सस्ता हुआ डीजल, पेट्रोल की कीमत में नहीं हुआ कोई बदलाव, जानिए 20 अप्रैल को आपके शहर में क्या है ईंधन का रेट / Image: IBC24 Customized
बिजनेस: Petrol Diesel Price Today 20 April 2026: पेट्रोल-डीजल की तेजी से बढ़ती कीमतों ने आम जनता का जीना हराम कर रखा है। इजराइल-ईरान के बीच जारी तनाव के चलते ईंधन के दाम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। लेकिन इस बीच राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल सरकार ने डीजल के रेट में कटौती करने का फैसला करते हुए 32.12 रुपए की कमी की है। हालांकि पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का ये फैसला आम जनता के लिए किसी सौगात से कम नहीं है।
Petrol Diesel Price Today 20 April 2026: मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने डीजल के रेट में 32.12 रुपए की कमी करने की घोषणा की है। दाम में गिरावट आने के बाद पाकिस्तान में डीजल का रेट 353.42 रुपए प्रति लीटर हो गया है। जबकि इससे पहले वाहन मालिकों को एक लीटर डीजल के लिए 385.54 रुपए चुकाना पड़ता था। वहीं, पेट्रोल की कीमत की बात करें तो 366.58 रुपए प्रति लीटर की दर से लोगों को भुगतान करना पड़ेगा।
बता दें कि इजराइल-ईरान युद्ध के चलते पाकिस्तान में ईंधन का संकट आ पड़ा था। डीजल बचाने के लिए सरकार ने सरकारी काम-काम में कई प्रतिबंध लगा दिए थे। वहीं, कई शहरों में तो लॉकडाउन जैसे हालात हो गए थे। बात करें यहां डीजल के रेट की तो बिगड़ते हालात में यहां डीजल की कीमत अपने उच्चतम स्तर 520.35 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। डीजल को महंगाई बढ़ाने वाला प्रमुख ईंधन माना जाता है क्योंकि इसका उपयोग माल परिवहन में व्यापक रूप से होता है।
सरकार ने फिलहाल सभी पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। जानकारी के मुताबिक डीजल पर करीब 36 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाया जा रहा है, जबकि पेट्रोल पर कुल टैक्स 107 रुपए प्रति लीटर है, जिसमें पेट्रोलियम लेवी, कस्टम ड्यूटी और क्लाइमेट सपोर्ट लेवी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में कीमतों में और गिरावट की संभावना है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को मिल सकता है। इस बीच ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओगरा) ने 34 ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 38 अरब रुपये की सब्सिडी जारी की है। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल सरकार के लिए सबसे बड़े राजस्व स्रोत हैं, जहां हर महीने इनकी खपत 7 से 8 लाख टन तक रहती है।