PF Reduce Interest Rates: कर्मचारियों को लगेगा बड़ा झटका! PF पर मिलने वाला ब्याज हो सकता है कम! EPFO ने दिए ये संकेत
PF Reduce Interest Rates: मार्च के पहले हफ्ते EPFO की 239वीं CBT बैठक में 2025-26 के लिए पीएफ ब्याज दर पर फैसला हो सकता है। चुनावी दबाव के बीच दर घटाने या 8.25% बरकरार रखने पर चर्चा जारी है।
(PF Reduce Interest Rates/ Image Credit: IBC24 News)
- EPFO की 239वीं CBT बैठक मार्च के पहले हफ्ते में होगी
- 2025-26 के लिए PF ब्याज दर 8% से 8.20% के बीच हो सकती है
- चुनावी दबाव के कारण दर में बदलाव न होने की संभावना भी है
नई दिल्ली: PF Reduce Interest Rates News कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक मार्च के पहले हफ्ते में होने जा रही है। इस बैठक में 2025-26 के लिए पीएफ डिपॉजिट पर ब्याज दर तय की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, ब्याज दर को फिलहाल के 8.25% से थोड़ा घटाकर 8% से 5.20% के बीच रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य EPFO के फंड पर अधिक वित्तीय दबाव न पड़ने देना है।
चुनावी दबाव से दर पर असर (Electoral Pressure Impacts Rates)
सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में आगामी चुनावों के चलते पॉलिटिकल दबाव बना हुआ है। ऐसे में EPFO लगातार तीसरे साल ब्याज दर में बदलाव न करते हुए 8.25% को बरकरार रख सकता है। बैठक में सभी विकल्पों पर विचार होगा, लेकिन फंड की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए दर में मामूली कमी की संभावना भी बनी हुई है।
नए सब्सक्राइबर और फंडिंग का दबाव (New Subscribers and Funding Pressure)
विकसित भारत एम्प्लॉयमेंट स्कीम के तहत EPFO में तेजी से नए सब्सक्राइबर जुड़ रहे हैं। अधिक लोगों के जुड़ने से भविष्य में भुगतान का दबाव बढ़ेगा। इसलिए, ब्याज दर थोड़ी कम रखकर EPFO के पास मिनिमम फाइनेंशियल बफर बनाए रखने की योजना है। CBT की बैठक के बाद ब्याज दर को पहले फाइनेंस मिनिस्ट्री से मंजूरी मिलेगी और फिर लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मिनिस्ट्री द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर सब्सक्राइबर खातों में क्रेडिट किया जाएगा।
सोशल सिक्योरिटी कवरेज (Social Security Coverage)
EPFO की फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी (FIAC) फरवरी के आखिरी हफ्ते में बैठक करेगी। इस बैठक में वर्तमान वित्तीय वर्ष में निवेश से हुए रिटर्न के आधार पर ब्याज दर तय की जाएगी और इसे CBT के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड से यह भी उम्मीद है कि वे सैलरी लिमिट को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने पर विचार करेंगे। इससे अधिक कर्मचारियों को EPFO के सामाजिक सुरक्षा कवरेज में शामिल किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की हिदायत (Supreme Courts instruction)
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने EPFO को निर्देश दिया था कि वह चार महीने के अंदर सैलरी लिमिट बढ़ाने का फैसला करे। कोर्ट ने कहा कि बढ़ती सैलरी और महंगाई के चलते कई वर्कर अनिवार्य PF कवरेज से बाहर हो गए हैं। 15,000 रुपये की सैलरी लिमिट साल 2014 से अपरिवर्तित है। FIAC, जो CBT की सब-कमेटी है, ब्याज दर, निवेश रणनीति और ऑडिट निगरानी की जिम्मेदारी संभालती है। इस बार की बैठक में ब्याज दर और सैलरी लिमिट दोनों ही अहम मुद्दे होंगे।
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