(EPF Withdrawal Rules/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: EPF Withdrawal Rules: नौकरी करने वाले अधिकर लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद साधन माना जाता है। इससे हर महीने कर्मचारी और कंपनी दोनों की ओर से एक तय राशि जमा की जाती है। इस रकम पर सरकार की ओर से तय ब्याज भी मिलता है जो समय के साथ बढ़ता रहता है। इसका मुख्य उद्देश्य नौकरी खत्म होने के बाद व्यक्ति को एक मजबूत आर्थिक मदद देना है।
EPF की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग है जिसमें जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज भी आगे चलकर ब्याज कमाने लगता है। अगर पैसा लंबे समय तक खाते में रहता है तो छोटी रकम भी धीरे-धीरे बड़ा फंड बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, EPF में पैसा जितना लंबे समय तक रहता है उसका रिटर्न उतना ही ज्यादा बढ़ता है। यही वजह है कि इसे रिटायरमेंट प्लानिंग का मजबूत आधार माना जाता है।
कई लोग अचानक पैसों की जरूरत या निजी खर्चों के लिए EPF से पैसा निकाल लेते हैं जैसे शादी, यात्रा या गाड़ी खरीदना। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करने से भविष्य की बड़ी बचत प्रभावित होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति नौकरी के शुरुआती सालों में 1 लाख रुपये निकाल लेता है तो वही रकम अगर EPF में रहती तो 8.25% ब्याज के साथ रिटायरमेंट तक लगभग 11.78 लाख रुपये तक बन सकती थी। इसी तरह बड़ी निकासी से लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है।
अगर कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये जैसी बड़ी राशि EPF से निकाल लेता है तो इसका असर रिटायरमेंट फंड पर बहुत बड़ा पड़ता है और यह नुकसान लाखों से लेकर करोड़ों तक हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि EPF को सामान्य बचत खाते की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके बजाय लोगों को अलग से एक इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए। ताकि अचानक जरूरत पड़ने पर EPF से पैसा निकालने की नौबत न आए और रिटायरमेंट का भविष्य सुरक्षित रहे।