नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की याचिका खारिज

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नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की याचिका खारिज

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 09:44 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 09:44 PM IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने रियल एस्टेट कंपनी शुभकामना बिल्डटेक की दिवाला प्रक्रिया में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने के आग्रह वाली नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की अपील खारिज कर दी है।

दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में 2026 में किया गया संशोधन कानून के आधार पर बने शुल्क को सुरक्षित हित मानने की अनुमति नहीं देता। इसके साथ ही पीठ ने दोनों प्राधिकरणों को असुरक्षित परिचालन ऋणदाता मानने के पहले के फैसले को बरकरार रखा।

नोएडा ने 99.32 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 60.64 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। समाधान योजना में इनके लिए क्रमशः 25 करोड़ रुपये और 18.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

प्राधिकरणों ने उच्चतम न्यायालय के ‘राज्य कर अधिकारी बनाम रेनबो पेपर्स लिमिटेड’ और ‘ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाम प्रभजीत सिंह सोनी’ मामलों के फैसलों का हवाला दिया था। हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि 26 मई, 2026 से लागू संशोधन के बाद केवल कानून के आधार पर बने शुल्क के जरिये ‘सुरक्षा हित’ का दावा नहीं किया जा सकता।

एनसीएलएटी ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों और कंपनी के बीच हुए जमीन के पट्टे के दस्तावेजों में सभी बकायों पर सामान्य और बिना शर्त शुल्क का प्रावधान नहीं था।

घर खरीदारों की ओर से पेश वकील आदित्य पारोलिया ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों के दावों और समाधान योजना में किए गए प्रावधान के बीच करीब 116 करोड़ रुपये का अंतर था। अपील मंजूर होने पर यह राशि घर खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ बन सकती थी।

उन्होंने कहा कि फैसले के बाद शुभकामना सिटी और शुभकामना टेकहोम्स परियोजनाओं के घर खरीदारों को समाधान योजना के तहत अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

समाधान योजना को ऋणदाताओं की समिति ने 87 प्रतिशत से अधिक मतों से मंजूरी दी थी। एनसीएलएटी के निर्देश पर हुए मतदान में हिस्सा लेने वाले 95.6 प्रतिशत घर खरीदारों ने दोनों प्राधिकरणों को सुरक्षित लेनदार का दर्जा देने के खिलाफ मतदान किया था।

एनसीएलएटी ने अपने 43 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘‘अपीलें खारिज की जाती हैं।’’

भाषा योगेश रमण

रमण