नीति में बदलाव से ओडिशा के बिजली क्षेत्र में आ सकता है 30,000 करोड़ रुपये का निवेश

नीति में बदलाव से ओडिशा के बिजली क्षेत्र में आ सकता है 30,000 करोड़ रुपये का निवेश

नीति में बदलाव से ओडिशा के बिजली क्षेत्र में आ सकता है 30,000 करोड़ रुपये का निवेश
Modified Date: May 26, 2026 / 05:05 pm IST
Published Date: May 26, 2026 5:05 pm IST

भुवनेश्वर, 26 मई (भाषा) ओडिशा में अगले छह से 12 महीनों में बिजली क्षेत्र में 25,000-30,000 करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है। इसका कारण राज्य ने तापीय बिजली संयंत्रों से रियायती बिजली आवंटन पर केंद्र की नीति का अनुसरण करना शुरू कर दिया है। बिजली उत्पादों के संघ के एक अधिकारी ने यह बात कही।

राज्य सरकार चालू तापीय बिजलीघरों से पांच प्रतिशत क्षमता की आपूर्ति परिवर्तनीय दरों पर अनिवार्य करने जा रही है। यह उसकी पिछली नीति का स्थान लेगी जिसके तहत परियोजना विकसित करने वालों को राज्य की खपत के लिए 12-14 प्रतिशत क्षमता रियायती दर पर आवंटित करनी होती थी।

उद्योग जगत के अधिकारियों ने कहा कि ओडिशा में प्रचुर कोयला भंडार और बंदरगाह तक पहुंच और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सहित रणनीतिक लाभ के बावजूद, पिछली नीति ने नए निवेश को हतोत्साहित किया था।

बिजली उत्पादों के संघ के महानिदेशक इंदर केशरी ने कहा कि ओडिशा में विद्युत क्षेत्र के विकास के लिए सभी अनुकूल कारक मौजूद हैं, लेकिन परिवर्तनीय लागत पर बिजली के अधिक अनिवार्य आवंटन ने परियोजनाओं की व्यावहारिकता को प्रभावित किया है।

राज्य ने 2008-09 में लागू 14 प्रतिशत आवंटन मानदंड को बरकरार रखा था। इसे बाद में स्थानीय कोयला आधारित परियोजनाओं के लिए इसे घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया था, जबकि कई राज्यों ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की पांच प्रतिशत आवंटन योजना की सिफारिश को अपनाया था।

उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा में प्रचुर मात्रा में कच्चा माल, बंदरगाहों की उपलब्धता, बढ़ती अर्थव्यवस्था और कुशल मानव संसाधन तक पहुंच जैसी विद्युत क्षेत्र के विकास के लिए सभी अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। हालांकि, परिवर्तनीय लागत पर बिजली के उच्च अनिवार्य आवंटन ने कंपनियों को हतोत्साहित किया है।’’

केशरी ने कहा, ‘‘इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ में पांच प्रतिशत कोटा लागू होने से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप 16 गीगावाट से अधिक क्षमता का इजाफा हुआ है। तुलनात्मक रूप से, ओडिशा में चार गीगावाट से कम क्षमता स्थापित की गई है, जिसके परिणामस्वरूप 40,000 करोड़ रुपये से कम का निवेश हुआ है।’’

अब ओडिशा में उद्योग जगत की रुचि फिर से जग रही है। जिंदल पावर, वेदांता और अदाणी जैसी कंपनियां राज्य में अवसरों का मूल्यांकन कर रही हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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